अग्नि-3 मिसाइल का सफल परीक्षण, अब चीन और पाकिस्तान की खैर नहीं, कितनी ताकतवर है यह हथियार?
Agni 3 Missile News : इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का सफल परीक्षण हो गया है। इस मिसाइल की रेंज 3500 किमी है। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ को बधाई दी है। इससे पड़ोसी देशों में हड़कंप मच गया है।
- Written By: रंजन कुमार
अग्नि-3 मिसाइल।
Agni 3 Missile Successful Test News : भारत की रणनीतिक सैन्य ताकत में आज एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का सफल परीक्षण किया गया। स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में हुए इस लॉन्च ने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया कि भारत की सुरक्षा दीवार अभेद्य है।
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-3 मिसाइल भारतीय रक्षा प्रणाली की रीढ़ मानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी मारक क्षमता और अविश्वसनीय रफ्तार है। 3,000 से 5,000 किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल न केवल पूरे पाकिस्तान को, बल्कि चीन के अधिकांश हिस्सों को भी अपनी जद में लेती है। कम वजन होने के कारण इसकी रेंज को जरूरत पड़ने पर और भी बढ़ाया जा सकता है।
कितनी रफ्तार?
इसकी रफ्तार मैक 15 (लगभग 18,522 किलोमीटर प्रति घंटा) है, जिसका अर्थ है कि यह एक सेकंड में 5 से 6 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इतनी प्रचंड गति दुश्मन को संभलने या पलक झपकाने तक का मौका नहीं देती। 17 मीटर लंबी और 50 हजार किलो वजनी यह मिसाइल आधुनिक रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम से लैस है, जो इसे उड़ान के दौरान भी अपना लक्ष्य बदलने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है।
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Intermediate Range Ballistic Missile ‘Agni-3’ was successfully test-fired from the Integrated Test Range, Chandipur, Odisha on February 06, 2026 The launch validated all operational and technical parameters. It was carried out under the aegis of the Strategic Forces Command… — PIB India (@PIB_India) February 6, 2026
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ड्रोन खतरों से निपटेगा भारत
अग्नि-3 के सफल परीक्षण के साथ ही भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस और निगरानी प्रणाली को भी आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेना ने 30 लो-लेवल लाइटवेट रडार की खरीद के लिए करीब 725 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जा रही है ताकि इन्हें जल्द से जल्द सीमाओं पर तैनात किया जा सके। ये रडार विशेष रूप से छोटे ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और धीमी गति वाले लक्ष्यों को पकड़ने में माहिर होंगे। आज के दौर में ड्रोन से बढ़ते खतरों को देखते हुए यह फैसला देश की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इस सफल परीक्षण और रक्षा सौदों से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और स्ट्रैटेजिक डिटरेंस क्षमता को लेकर पूरी तरह सजग और आत्मनिर्भर है।
