नितिन नबीन के सामने क्या होंगी चुनौतियां? 'मिशन साउथ' से 2029 चुनाव तक खुद को करना होगा साबित
Challenges For Nitin Nabin: नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे BJP के 12वें और अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। महज 45 वर्ष की उम्र में यह जिम्मेदारी संभालने वाले वे पार्टी के इतिहास के पहले नेता हैं। हालांकि नितिन नबीन निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं, लेकिन आगे की राह उनके लिए आसान नहीं होगी। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच संतुलन और बेहतर तालमेल बनाने की बड़ी चुनौती रहेगी। इसी कारण पार्टी हाईकमान ने करीब 14 करोड़ सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे नितिन नबीन को उम्र के आधार पर न आंकें, बल्कि उनके पद की गरिमा और प्रोटोकॉल का पालन करें।
उनके सामने दूसरी अहम चुनौती पिछले 10 वर्षों से जारी पार्टी विस्तार की रफ्तार को बनाए रखने की होगी। 2029 के लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए संगठन का निरंतर विस्तार बेहद जरूरी माना जा रहा है।
नितिन नबीन को BJP शासित राज्यों में सत्ता बरकरार रखने के साथ-साथ दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की चुनौती का भी सामना करना होगा। 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में अब तक BJP सरकार नहीं बना पाई है। वहीं असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाने की चुनौती भी उनके सामने है। कर्नाटक में जारी अंदरूनी कलह को खत्म करना भी नितिन नबीन के लिए एक बड़ा चैलेंज होगा। इसके अलावा अन्य राज्यों में स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद दूर कर बेहतर समन्वय स्थापित करना भी जरूरी रहेगा।
2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद BJP दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है। वर्तमान में करीब 25 राज्यों में BJP अकेले या सहयोगी दलों के साथ सत्ता में है, जबकि बाकी राज्यों में भी पार्टी को अपनी सरकार बनाने का लक्ष्य हासिल करना है।
नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश में पहली बार हो रही जातिगत जनगणना भी होगी, क्योंकि इसके नतीजे भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित करेंगे। कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। OBC और सवर्ण जातियों की वास्तविक संख्या सामने आने से नए समीकरण बनेंगे, जिनके साथ BJP को सामंजस्य बैठाना होगा। बीते कुछ वर्षों में राजनीति का फोकस जातिगत मुद्दों पर बढ़ा है।
जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया जाएगा, जिससे महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा। ऐसे में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें जीत की ओर ले जाना पार्टी के लिए एक नई चुनौती होगी।
2029 के लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का समय बाकी है, लेकिन यह चुनाव नितिन नबीन के लिए बड़ा इम्तिहान साबित होगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने BJP को कड़ी टक्कर दी थी। पार्टी 400 सीटों के लक्ष्य से चूक गई थी और 250 से कम सीटें हासिल कर सकी थी। उत्तर प्रदेश में BJP को सबसे बड़ा झटका लगा था, जहां पार्टी की जीत की रफ्तार थम गई थी।
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2029 के चुनाव नए परिसीमन और महिला आरक्षण के साथ होंगे। ऐसे में नितिन नबीन को बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ तालमेल बैठाते हुए पार्टी की जीत के लिए नई और प्रभावी रणनीति तैयार करनी होगी।