उद्धव गुट के नेता संजय राउत (फोटो- सोशल मीडिया)
Sanjay Raut on BJP vs Rahul Gandhi Controversy: बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हुई अपमानजनक टिप्पणी ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। इस मामले पर अब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने इस पूरी घटना का ठीकरा बीजेपी पर ही फोड़ दिया है। राउत का आरोप है कि राहुल गांधी और इस यात्रा को बदनाम करने के लिए बीजेपी किसी भी हद तक गिर सकती है, और ये गाली देने वाले लोग भी उन्हीं के हो सकते हैं।
यह पूरा विवाद बिहार के दरभंगा के एक कथित वीडियो के वायरल होने के बाद शुरू हुआ। इस वीडियो में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के मंच से प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कुछ कार्यकर्ता नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से गरमा गया। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव वहां मौजूद नहीं थे।
VIDEO | Mumbai: “BJP can go to any extent to malign our Yatra and Rahul Gandhi; they must have sent their own workers to the Yatra,” says Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut, referring to the abuses hurled at PM Modi during the ‘Voter Adhikar Yatra’ in Bihar.
(Full VIDEO available on… pic.twitter.com/3J1D47lrWh
— Press Trust of India (@PTI_News) August 29, 2025
जब संजय राउत से इस यात्रा में पीएम मोदी को दी जा रही गालियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा, “कौन दे रहा है गाली? कोई कार्यकर्ता देता होगा लेकिन बीजेपी के लोग भी अंदर छोड़े होते हैं।” राउत ने आगे कहा कि किसी भी अच्छे काम को, जैसे ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और राहुल गांधी को बदनाम करने के लिए, बीजेपी वाले किसी भी स्तर तक नीचे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हमारा ऐसा अनुभव रहा है। उनके मुताबिक ये उनके ही लोग होंगे।
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दूसरी ओर, इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी में जरा भी शर्म बची है, तो उन्हें इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए प्रधानमंत्री मोदी और देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। अमित शाह ने इस यात्रा के उद्देश्य पर ही सवाल उठाते हुए इसे ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की जगह ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ करार दिया, अब इस मामले पर राजनीतिक तनाव और भी लगातार बढ़ता जा रहा है।