शिक्षित या बेरोजगार भारत? 10 में से 7 ग्रेजुएट दर-दर भटकने को मजबूर; आंकड़ों में खुला बेरोजगारी का खौफनाक सच

Unemployment Crisis India: बजट 2026 ने स्किलिंग प्रोग्राम के लिए एलोकेशन को लगभग 62% बढ़ाकर लगभग ₹9,886 करोड़ कर दिया, लेकिन कौशिक का मानना ​​है कि समस्या के साइज की तुलना में यह अभी भी बहुत छोटा है।
graduates unemployment in india
कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

66 Percent Graduates Unemployed: भारत में युवाओं में बेरोजगारी का आंकड़ा हेडलाइन लेवल पर ठीक-ठाक लग सकता है, लेकिन करीब से देखने पर एक चिंताजनक ट्रेंड दिखता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक के मुताबिक, बेरोजगार आबादी में ग्रेजुएट्स का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिससे देश के एजुकेशन सिस्टम और स्किल रेडीनेस को लेकर चिंता बढ़ रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कौशिक ने लिखा कि फ्रांस और OECD जैसे देशों में युवाओं में बेरोजगारी की दर ज्यादा बनी हुई है, वहीं भारत एक अलग स्ट्रक्चरल समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 66% बेरोजगार ग्रेजुएट हैं। ज्यादातर देशों में डिग्री बेरोजगारी से बचाने का काम करती है, लेकिन यहां यह एक कमजोरी बन गई है।

भारत में ग्रेजुएट बेरोजगारी दर कितना?

नितिन कौशिक के मुताबिक, भारत में ग्रेजुएट बेरोजगारी दर लगभग 29% है, जो इसी डेमोग्राफिक के लिए कई उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं से ज्यादा है। इससे पता चलता है कि हायर एजुकेशन नौकरी पाने में मदद नहीं कर रही है, जिससे क्वालिफिकेशन और मार्केट की मांग के बीच एक अंतर पैदा हो रहा है। भारत के दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक बने रहने की उम्मीद है, अनुमानों से पता चलता है कि 2031 तक लगभग 63% आबादी काम करने की उम्र वाले ग्रुप में हो सकती है। हालांकि, कौशिक ने चेतावनी दी कि अगर नौकरी बनाने और स्किल डेवलपमेंट में तेजी नहीं आई तो डेमोग्राफिक फायदा एक बोझ बन सकता है।

प्रोफेशनल डिग्रियों के बाद नौकरी नहीं

कौशिक ने कहा कि अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहे, तो हम डेमोग्राफिक डिविडेंड नहीं, बल्कि एक बड़ी, पढ़ी-लिखी लेकिन कम नौकरी वाली आबादी को देख रहे हैं। कई प्रोफेशनल डिग्रियां असल में नौकरी के रास्ते के बजाय सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए इंतजार का समय बन गई हैं। साउथ कोरिया जैसे देशों ने जनरल एकेडमिक डिग्रियों को बढ़ाने के बजाय वोकेशनल और टेक्निकल ट्रेनिंग पर फोकस करके युवाओं में बेरोजगारी को काफी कम रखने में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने मजबूत वोकेशनल सिस्टम के जरिए स्पेशलिस्ट तैयार किए, जबकि हम सर्टिफिकेट वाले जनरलिस्ट तैयार कर रहे हैं।

यूनियन बजट 2026 ने स्किलिंग प्रोग्राम के लिए एलोकेशन को लगभग 62% बढ़ाकर लगभग ₹9,886 करोड़ कर दिया, लेकिन कौशिक का मानना ​​है कि समस्या के साइज की तुलना में यह स्केल अभी भी बहुत छोटा है। यह एलोकेशन कुल सरकारी खर्च का 0.2% से भी कम है, जो 30% के करीब ग्रेजुएट बेरोजगारी दर को ठीक करने के लिए काफी नहीं है।

ट्रेडिशनल डिग्री की वैल्यू हुई कम

उन्होंने मिडिल-क्लास परिवारों पर पड़ने वाले फाइनेंशियल बोझ का भी जिक्र किया है, जो बदले में स्टेबल करियर की उम्मीद में हायर एजुकेशन में भारी इन्वेस्ट करते रहते हैं। लेकिन, जॉब मार्केट अब ग्रेजुएट्स को उसी रफ्तार से नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि माता-पिता ट्यूशन के लिए पैसे बचा रहे हैं, लेकिन मार्केट अब उन डिग्रियों को नहीं खरीद रहा है जो वे ऑफर करती हैं। ट्रेडिशनल डिग्री की वैल्यू मिडिल-क्लास पोर्टफोलियो में ज्यादातर एसेट्स की तुलना में तेजी से कम हो रही है।

कौशिक ने आगे कहा कि मुद्दा स्टूडेंट्स में कोशिश की कमी नहीं है, बल्कि एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट पाइपलाइन में एक स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम है। उन्होंने कहा कि हम क्रेडेंशियल्स में ज्यादा इन्वेस्ट करते हैं और कॉम्पिटेंस में कम। उन्होंने प्रैक्टिकल स्किल्स, वोकेशनल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री से जुड़ी एजुकेशन पर ज्यादा फोकस करने की अपील की।

Navbharat Live
navbharatlive.com