

Sanjay Raut On Gutter Gas By PM Modi: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने देश में गहराते एलपीजी (LPG) संकट को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राउत ने सरकार के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा है कि गैस की आपूर्ति सुचारू है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद यह दूसरी बार है जब सरकार ने आम जनता को सड़कों पर कतारों में खड़ा कर दिया है। राउत ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब सरकार अपने पुराने वादे के अनुसार 'गटर' से गैस निकालकर लोगों के घरों तक पहुंचाएगी?
सांसद राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, लेकिन उन्हें देश के जमीनी हालात देखने चाहिए। उन्होंने पटना, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और लखनऊ का उदाहरण देते हुए कहा कि हर राज्य में लोग खाली सिलेंडर लेकर भटक रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि शायद सत्ताधारी नेताओं के घरों में गैस इजरायल या राष्ट्रपति ट्रंप के यहां से सीधे आती होगी, इसलिए उन्हें जनता की तकलीफ नजर नहीं आ रही है।
संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी के उस पुराने बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने गटर से निकलने वाली गैस से चाय बनाने का जिक्र किया था। राउत ने कहा, "प्रधानमंत्री जी, आपने गटर गैस के बारे में बड़ी-बड़ी बातें की थीं। अब देश में सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, तो क्या सरकार लोगों के घरों के पास मौजूद गटरों पर प्लांट खड़ी करेगी? क्या अब गटर से गैस निकालकर जनता को दी जाएगी?" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उज्ज्वला योजना के नाम पर वोट तो ले लिए, लेकिन आज उन गरीबों के चूल्हे ठप पड़े हैं।
संजय राउत ने वर्तमान एलपीजी संकट की तुलना 2016 की नोटबंदी से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों को अपने ही पैसे निकालने के लिए लाइनों में लगकर जान गंवानी पड़ी थी, आज वैसी ही स्थिति रसोई गैस के लिए पैदा हो गई है। लोग सुबह 4 बजे से गैस एजेंसियों के बाहर खड़े हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस भेजा जा रहा है। राउत के अनुसार, यह सरकार की विफलता है कि वह अंतरराष्ट्रीय संकट (ईरान-इजरायल युद्ध) का बहाना बनाकर घरेलू आपूर्ति प्रबंधन से पल्ला झाड़ रही है।
राउत ने केवल गैस ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में आए संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध की वजह से भारत से होने वाला तरबूज, खरबूज और पपीते का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। इसके कारण स्थानीय मंडियों में फलों के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार निर्यातकों और किसानों को इस घाटे से उबारने के लिए क्या कर रही है? वर्तमान में सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर संग्राम छिड़ा हुआ है।