
मोहन भागवत और मुकुंद सीआर (फोटो- सोशल मीडिया)
बेंगलुरूः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 3 दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का शुक्रवार यानी आज बेंगलुरू में शुभारंभ किया गया। इस सभा में संघ का उदारवादी चेहरा एक बार फिर देखने को मिला। बैठक की शुरूआत में कांग्रेस नेता व पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह व तबला वादक जाकिर हुसैन, प्रीतीश नंदी समेत संघ के दिवंगत कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी गई।
इस दौरान बीते करीब 2 साल से हिंसा की आग में झुलस रहे मणिपुर के हालातों पर संघ के सह कार्यवाहक मुकुंद सीआर ने चिंता जताई। हालांकि उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे शांति के प्रयासों पर उम्मीद जताई है। मुकुंद सीआर ने कहा कि राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों से उम्मीद की किरण दिख रही है, लेकिन अभी इसमें वक्त लगेगा।
उत्तर-दक्षिण में देश को बांटने की कोशिश
इन सब के अलावा वर्तमान सियासी परिदृष्य पर संघ का विचार व्यक्त किया गया। तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच भाषा और परिसीमन को लेकर छिड़ी जंग पर कहा कि कुछ ताकतें देश की एकता को चुनौती दे रही हैं। वह उत्तर और दक्षिण के बीच बहस को बढ़ावा दे रही हैं। इसके साथ ही भाषा और परिसीमन विवाद को राजनीति से प्ररेति करार दिया है।
संघ के सह कार्यवाहक ने कहा कि सभी सोशल ग्रुप को साथ आना होगा। यह सही नहीं है कि हम आपस में लड़ें। अगर कोई दिक्कत है तो उसे मिलकर, सद्भावना से हल किया जा सकता है। हमारे स्वयंसेवक और अलग अलग विचार परिवार के लोग सद्भावना की पूरी कोशिश कर रहे हैं, दक्षिण भारत के राज्यों में खासकर प्रयास किए जा रहे हैं।
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मुकुंद सीआर ने भाषा विवाद पर आरएसएस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि संघ ने हमेशा मातृभाषा में पढ़ाई पर जोर दिया है। सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जहां भी संभव हो मातृभाषा के ही इस्तेमाल की वकालत की है। उन्होंने कहा कि दो भाषा या तीन भाषा फॉर्मूला को लेकर संघ का कोई रिजॉल्यूशन नहीं है, लेकिन मातृभाषा को लेकर संघ का रिजॉल्यूशन है।
हमारा मानना है कि समाज में भी हमें कई भाषाएं सीखनी चाहिए। एक मातृभाषा और दूसरी मार्केट लैंग्वेज सीखनी चाहिए। तमिलनाडु में हैं तो तमिल, दिल्ली में हैं तो हिंदी सीखने की जरूरत होगी। इसी तरह करियर लैंग्वेज जैसे इंग्लिश या दूसरी भाषा भी जरूरी हैं।






