आज है राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी की पुण्यतिथि, जानें उनके जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें

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मुंबई: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' (Vande Mataram) के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी (Bankim Chandra Chatterjee) का आज पुण्यतिथि है। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुडी कुछ रोचक बातें। बंकिम चंद्र चटर्जी जन्म 27 जून 1838 को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के उत्तर 24 परगना जिले के कांठलपाड़ा नामक गांव में एक समृद्ध और परंपरागत बंगाली परिवार में हुआ था। उन्हें लोग बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से भी जानते हैं। बंगला के बेहद सम्मानित व प्रख्यात साहित्यकार, कवि, उपन्यासकार और पत्रकार थे। उनका निधन 8 अप्रैल 1894 को हुआ था।  

उनकी लेखन का अन्य भाषाओं पर भी काफी प्रभाव देखने को मिला। बंकिम चंद्र द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों को काफी प्रेरणा मिली थी। और आज भी इस गीत पर भारत को गर्व है और बड़े सम्मान से लोग इसे गाते हैं। 

अंग्रेजी भाषा को लेकर खत्म हुआ लगाव 

बंकिम चंद्र ने हुगली के मोहसीन कॉलेज में दाखिला लिया। ऐसा माना जाता है कि एक बार उनके अंग्रेजी के टीचर ने उन्हें बुरी तरह से डांटा था।  इससे वह काफी आहत हुए थे। तब से अंग्रेजी भाषा के प्रति उनका लगाव खत्म हो गया। यहीं से उनकी अपनी मातृभाषा के प्रति रूचि बढ़ने लगी। और धीरे-धीरे वह शिखर पर पहुंच गए। उनका विवाह महज 11 साल की उम्र में हो गया था। कुछ साल में ही उनकी पहली पत्नी का स्वर्गवास हो गया। बाद में उन्होंने दूसरा विवाह किया था। 

पिता की इच्छा का रखा मान 

वर्ष 1856 में उन्होंने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में एडमिशन लिया और 1857 के विद्रोह के दौरान प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीए की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बने। डिग्री पाने के बाद उन्होंने कानून की डिग्री भी हासिल की। उन्होंने 1858 में डिप्टी मजिस्ट्रेट का पदभार संभाला और 1891 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए। यह उनके पिता की दिली इच्छा थी ,जिसे उन्होंने पूरा किया।  

ये रचनाएं लिखीं

उन्होंने अपना पहला उपन्यास 'रायमोहन्स वाईफ' (अंग्रेजी में) लिखा था। साल 1865 में उनकी पहली बांग्ला कृति दुर्गेशनंदिनी प्रकाशित हुई थी। इसके अलावा उन्होंने कपालकुंडला, मृणालिनी, विषवृक्ष, रजनी, राजसिंह, देवी चौधुरानी आईं, सीताराम, कमला कांतेर दप्तर, कृष्ण कांतेर विल, विज्ञान रहस्य, लोकरहस्य और धर्मतत्व जैसी कई रचनाएं लिखीं। 

आंदोलन में अपनी रचनाओं से भाग लिया 

सरकारी नौकरी के चलते वह किसी सार्वजनिक आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं ले पाते थे। इसका उन्हें काफी मलाल रहता था। बाद में उन्होंने साहित्य के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जागृति का संकल्प लिया। और इसी पर काम करना शुरू कर दिया।  

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम 

बता दें कि बंकिम चन्द्र का सबसे चर्चित उपन्यास आनंदमठ है जिसका प्रकाशन साल 1882 में हुआ था। इसी उपन्यास से प्रसिद्ध राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम लिया गया है। जिसे लोग आज भी सम्मान के साथ गाते है और इस गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। उनकी रचनाओं का अनुवाद दुनिया की कई भाषाओं में किया गया और उन पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं।

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