तमिलनाडू में एनडीए का मास्टरप्लान, फोटो- सोशल मीडिया
Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु की सियासत पर काबिज होने का सपना देख रहे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन ने नामांकन की तारीखों के एलान के साथ ही अपनी सबसे बड़ी चुनौती यानी ‘सीटों के बंटवारे’ का समाधान निकाल लिया है। अगले कुछ दिनों में, यानी 30 मार्च से जब नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, तब मैदान में एनडीए के योद्धाओं की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
इस बार गठबंधन केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह AIADMK की उस महात्वाकांक्षा और भाजपा के बढ़ते आत्मविश्वास की कहानी है, जो तमिलनाडु के भविष्य की इबारत लिखने को बेताब है।
अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी इस बार किसी के भरोसे सत्ता की कुर्सी तक नहीं पहुंचना चाहते। गठबंधन के भीतर चल रही चर्चाओं से यह साफ संकेत मिल रहा है कि एआईएडीएमके कुल 234 सीटों में से 160 से 170 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह दृढ़ है। पार्टी का लक्ष्य है कि वह अपने दम पर बहुमत के जादुई आंकड़े यानी 118 सीटों को पार कर ले।
इस पूरे सीट शेयरिंग फॉर्मूले की सबसे दिलचस्प बात भारतीय जनता पार्टी का बढ़ता ग्राफ है। साल 2021 के चुनावों में जहां भाजपा केवल 20 सीटों पर सिमट गई थी, वहीं इस बार पार्टी लगभग 30 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी में दिख सकती है। यह बढ़ोत्तरी दिखाती है कि दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व ने तमिलनाडु की जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मेहनत की है।
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रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस पूरी बातचीत और गठबंधन के तालमेल की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं ताकि सहयोगियों के बीच किसी भी तरह के मतभेद की गुंजाइश न रहे। दिल्ली में हुई लंबी चर्चाओं के बाद अब पूरा ध्यान चेन्नई पर शिफ्ट कर दिया गया है, जहां इस गठबंधन की अंतिम रूपरेखा को औपचारिक रूप दिया जा रहा है।
एनडीए का यह कुनबा केवल दो दलों तक सीमित नहीं है। अंबुमणि रामदास की पीएमके को इस बार करीब 17 सीटें मिलने की उम्मीद है, जो उत्तरी तमिलनाडु के बेल्ट में गठबंधन को काफी मजबूती दे सकती है। वहीं, टीटीवी दिनाकरन की एएमएमके का 9 सीटों के साथ शामिल होना इस मुकाबले को और जटिल और रोमांचक बना रहा है।
एक खास रणनीतिक फैसले के तहत छोटे दल एआईएडीएमके के ‘दो पत्ती’ या भाजपा के ‘कमल’ चुनाव चिन्ह पर भी चुनाव लड़ सकते हैं, ताकि वोटों का बिखराव न हो। 2021 के कड़वे अनुभवों से सीख लेते हुए एनडीए इस बार बहुत ही आक्रामक रुख अपना रहा है। अब देखना यह है कि 6 अप्रैल तक जब नामांकन का दौर थमेगा, तब तक तमिलनाडु का यह सियासी ऊंट किस करवट बैठता है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)