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1-2 साल भी दूतावास में रखना पड़े तो रखेंगे…जब सुषमा स्वराज के एक आदेश से कांप उठा था पाकिस्तान

Sushma Swaraj: विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज ने मानवीय संवेदनाओं और त्वरित फैसलों से दुनिया भर में फंसे भारतीयों की मदद की। उजमा अहमद की वापसी उनकी सबसे प्रेरक उपलब्धियों में गिनी जाती है।

  • Written By: अक्षय साहू
Updated On: Aug 06, 2026 | 07:42 AM

सुषमा स्वराज (सोर्स- सोशल मीडिया)

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Sushma Swaraj Death Anniversary: ‘अगर आप मंगल ग्रह पर भी फंस गए हैं तो वहां भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा।’ मुस्कराते हुए अपने देश के नागरिकों के लिए हर पल मदद को तत्पर रहने वाली वो शख्सियत सुषमा स्वराज थीं। चेहरे पर तेज, वाणी में ओज और जिह्वा पर सरस्वती, भारतीय राजनीति की स्तंभ प्रखर वक्ता सुषमा स्वराज ने अपने कुशल नेतृत्व से इस देश के लोगों के जीवन में बदलाव लाने की पहल की। उन्होंने विदेश मंत्रालय का दरवाजा जिस तरह देश-विदेश के भारतीयों के लिए खोला वह अभूतपूर्व कदम था, जो हमेशा याद किया जाता रहेगा।

पिता से विरास्त में मिला संघ का अनुशासन

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में जन्मीं सुषमा स्वराज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक प्रमुख नेता की बेटी थीं। अंबाला कैंट के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीतिक विज्ञान में स्नातक करने के बाद पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1970 के दशक में समाजवादी नेताओं के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। सुषमा ने कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से 1975 में लागू किए गए आपातकालीन शासन का सक्रिय रूप से विरोध किया था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं।

25 की उम्र में पहली बार बनी विधायक

25 साल की उम्र में पहली बार विधायक बनी थी सुषमा स्वराज (सोर्स- सोशल मीडिया)

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जब 25 साल की उम्र में वह विधायक चुनकर आईं तो पीछे पलटकर नहीं देखा। उनको जो जिम्मेदारी मिलती, उन्होंने जी-जीन से निभाया। उन्होंने अपने चार दशक लंबे राजनीतिक करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें 1977 में 25 वर्ष की आयु में हरियाणा की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनना और 1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनना शामिल है। आगे चलकर वह भाजपा की शीर्ष नेताओं में से एक बन गईं। उन्होंने आखिरी बार भारत की विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया, जो इंदिरा गांधी के बाद इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला थीं।

विदेश मंत्री रहते हुए कि सैकड़ों लोगों की मदद

विदेश मंत्री रहते सुषमा स्वराज को यह फर्क नहीं पड़ता था कि कौन से देश में कौन फंसा है। सिर्फ एक ट्वीट के जरिए पता चलने पर उन्हें फर्क इससे पड़ता था कि कोई हिंदुस्तानी है तो वह हर कीमत पर स्वदेश वापस लौटना चाहिए। कुछ इसी तरह के एक किस्से की बात करते हैं, जब पाकिस्तान में एक भारतीय मूल की लड़की को बंदूक की नोक पर शादी करने के लिए मजबूर किया गया था और सुषमा स्वराज ने उसे एक नई जिंदगी दी।

उजमा को पाकिस्तान के निकाल लाई थी सुषमा स्वराज (सोर्स- सोशल मीडिया)

इस भारतीय लड़की का नाम था उजमा अहमद, जिसकी मुलाकात मलेशिया में पाकिस्तानी नागरिक ताहिर अली से हुई। वह 1 मई को पड़ोसी देश में उसके घर गई, जहां उसे पता चला कि ताहिर अली की पहले ही शादी हो चुकी थी और उसके चार बच्चे थे। पाकिस्तान पहुंचने के बाद उजमा अहमद को एहसास हो चुका था कि पाकिस्तान उसके लिए अब एक मौत का कुआं है।

उजमा की नोक पर हुई थी शादी

पाकिस्तान में उजमा के साथ जो कुछ घटा था, वो बेहद खौफनाक था। बंदूक की नोक पर शादी करा दी गई थी और यातनाएं झेलनी पड़ीं। एक दिन उजमा ने भागकर भारतीय उच्चायोग में शरण ली। भारतीय उच्चायोग में प्रवेश करना आसान नहीं था। ताहिर अली को धोखा देकर उसे वहां ले जाने के लिए इस्लामाबाद में दूतावास में काम करने वाले एक दंपति ने उसके भाई और भाभी होने का नाटक किया था।

उजमा को धोखे से पाकिस्तान में किया गया था कैद (सोर्स- सोशल मीडिया)

एक इंटरव्यू में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया था, ताहिर अली लालची था और उजमा ने हालातों को समझा। उसने ताहिर अली से कहा कि वह उच्चायोग में अपने ‘रिश्तेदारों’ से उसके लिए कुछ पैसे दिलवा सकती है। यह तरीका काम कर गया।

उजमा के लिए पाकिस्तान सरकार से लड़ने को थी तैयार

जब उजमा भारतीय उच्चायोग में पहुंची तो अधिकारियों के सामने अपनी पूरी कहानी बताई। अगले दिन पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने सुषमा स्वराज से संपर्क किया, तो विदेश मंत्री होने के नाते उन्होंने तुरंत निर्देश दिया कि उजमा के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि की जाए। उनके पासपोर्ट की पूरी तरह से जांच की गई और भारत में उनके भाई के पते की भी पुष्टि की गई।

पाकिस्तान सरकार को दिया था सख्त संदेश (सोर्स- सोशल मीडिया)

उजमा की पहचान की पुष्टि होते ही भारतीय दूतावास के अधिकारियों को सुषमा स्वराज से एक आदेश मिला। उसमें लिखा था, अगर हमें उसे एक या दो साल के लिए भी उच्चायोग में रखना पड़े, तो हम रखेंगे। अगले दिन दूतावास के अधिकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किया। उच्चायोग में उजमा घबरा रही थी। ताहिर अली अपने चार साथियों के साथ उच्चायोग के बाहर घूम रहा था।

उजमा को तुरंत भारत लाना चाहती सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज उजमा को तुरंत भारत वापस लाना चाहती थीं लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति दोपहर लगभग 2:30 बजे मिली, वाघा सीमा द्वार के बंद होने से ठीक एक घंटे पहले। यह समझते हुए कि उससे पहले पहुंचना असंभव है, अधिकारियों ने उजमा को एक और दिन दूतावास में रखने का फैसला किया।

सुषमा स्वराज ने निस्वार्थ भाव से की लोगों की सेवा (सोर्स- सोशल मीडिया)

उच्चायोग के अधिकारी अगली सुबह 2:30 बजे उजमा के साथ सीमा के लिए रवाना हुए। वे सुबह करीब 7:30 बजे वाघा पहुंचे, जो सीमा द्वार खुलने से दो घंटे पहले का समय था। सुबह 9:30 बजे उजमा ने भारत में दोबारा प्रवेश किया। इसके तुरंत बाद जश्न शुरू हो गया। ऐसी यह सिर्फ एक कहानी नहीं है। चाहे बांग्लादेश के शेल्टर होम से एक बच्चे को वापस लाने की कहानी हो या यमन में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी हो, अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान सुषमा स्वराज ने व्यक्तिगत मदद से कई परिवारों की जिंदगी संवारी।

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निस्वार्थ भाव से की लोगों की मदद

सुषमा स्वराज इतनी मृदुभाषी थीं कि हर कार्यकर्ता को उन्होंने अपना परिवार समझा। तभी तो न सिर्फ भाजपा बल्कि विपक्षी दलों में भी सुषमा स्वराज खासी लोकप्रिय थीं। सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्री रहते हुए न सिर्फ दूसरे देशों में फंसे लोगों की मदद कि बल्कि अपने कार्यकाल में उन्होंने ऐसे विदेशी नागरिकों की भी मदद कि जो इलाज के लिए भारत आना चाहते थे। उन्होंने बिना भेदभाव किया विदेशी नागरिकों के भारत आकर इलाज कराने की व्यवस्था, इसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल थे। 6 अगस्त 2019 को 67 वर्ष की आयु में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हो गया था।

Sushma swaraj death anniversary how she rescued uzma ahmed from pakistan

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Published On: Aug 06, 2026 | 07:28 AM

Topics:  

  • BJP
  • India
  • Pakistan
  • Sushma Swaraj

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