पिछड़ों को कभी नहीं मिला हक…राज्यसभा में संजय सिंह का यह धमाकेदार भाषण सुन उड़ जाएंगे होश! देखें VIDEO
Sanjay Singh speech: राज्यसभा में सांसद संजय सिंह ने अदालतों में लंबित मामलों और जजों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा व अन्य क्षेत्रों में वंचितों के प्रतिनिधित्व पर गंभीर सवाल खड़े किए।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
Rajya Sabha Sanjay Singh vs Central Government: राज्यसभा में आप सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों और जजों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे। संजय सिंह ने कहा कि देश के जिला न्यायालयों, उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में करोड़ों मामले पेंडिंग पड़े हैं, लेकिन उस अनुपात में जजों और अदालतों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कांशीराम के नारे “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी” का हवाला देते हुए न्यायपालिका, कार्यपालिका और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और वंचित तबकों के प्रतिनिधित्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस सरकार में शोषित और पिछड़े वर्गों को कभी उनका हक और उचित न्याय नहीं मिला है। उनके इस आक्रामक और बेबाक भाषण के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है और विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
Rajya Sabha Sanjay Singh vs Central Government: राज्यसभा में आप सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों और जजों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे। संजय सिंह ने कहा कि देश के जिला न्यायालयों, उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में करोड़ों मामले पेंडिंग पड़े हैं, लेकिन उस अनुपात में जजों और अदालतों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कांशीराम के नारे “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी” का हवाला देते हुए न्यायपालिका, कार्यपालिका और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और वंचित तबकों के प्रतिनिधित्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस सरकार में शोषित और पिछड़े वर्गों को कभी उनका हक और उचित न्याय नहीं मिला है। उनके इस आक्रामक और बेबाक भाषण के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है और विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
