सुप्रीम कोर्ट के आदेश का डॉक्टरों पर असर नहीं, 16वें दिन भी हड़ताल की वजह से स्वास्थ सेवाएं प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों से काम पर लौटने की अपील बृहस्पतिवार को दोहरायी थी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ‘‘न्याय और औषधि'' को रोका नहीं जा सकता। इसके बाद भी जूनियर डॉक्टर काम पर नहीं लौटे हैं। जिसका असर मरीजों पर हो रहा है।
डॉक्टरों के स्ट्राइक का मरीजों पर असर
स्ट्राइक पर डॉक्टर (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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कोलकाता: कोलकाता दरिदंगी मामले में आरोप संजय रॉय समेत अन्य 6 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट शुरू हो चुका है। इसके बाद इस मामले से जुड़े कई राज खुल सकते हैं। वहीं इस घटना के विरोध में जूनियर चिकित्सकों द्वारा लगातार आज 16वें दिन हड़ताल जारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कई डॉक्टर काम पर लौटने को तैयार नहीं है। जिसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लिया। राज्य सरकार से लगातार सवाल  किए जा रहे हैं। मामले को बेहतर तरीके से समझने के लिए 10 सदस्यीय नेशनल टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया गया। वहीं अदालत ने धड़ना पर बैठे जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर वापस काम पर जुटने को कहा था। इसके बाद भी अदालत के आदेश का डॉक्टरों पर कोई असर नहीं हो रहा है। आज भी डॉक्टर हड़ताल पर बैठे हैं। जिसकी वजह से स्वास्थ सेवाएं प्रभावित हो रही है।

प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं

मिल रही जानकारी के मुताबिक सरकारी अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं में वरिष्ठ चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं। कोलकाता मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल (केएमसीएच) के हड़ताल कर रहे एक चिकित्सक ने  कहा, ‘‘जब तक हमारी बहन को न्याय नहीं मिल जाता तब तक हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।''

SC का आदेश

उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता में चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों से काम पर लौटने की अपील बृहस्पतिवार को दोहरायी थी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ‘‘न्याय और औषधि'' को रोका नहीं जा सकता। साथ ही उसने चिकित्सकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि न्यायाधीश और चिकित्सक हड़ताल नहीं कर सकते क्योंकि वे जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों से निपटते हैं। जूनियर चिकित्सक महिला चिकित्सक के लिए न्याय की मांग करने के अलावा केएमसीएच प्रशासन में कई लोगों को हटाने की मांग कर रहे हैं।

ममता सरकार का एक्शन

पश्चिम बंगाल सरकार ने जूनियर चिकित्सकों की मांग को मानते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बुधवार को हटा दिया था। साथ ही अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य के पद पर स्थानांतरित करने के आदेश को भी रद्द कर दिया था।

एजेंसी इनपुट के साथ

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