
मेनका गांधी, फोटो- सोशल मीडिया
Supreme Court’s Decision regarding Stray Dogs: वरिष्ठ बीजेपी नेता और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला जस्टिस पारदीवाला के पिछले फैसले से भी ज्यादा हास्यास्पद है। मेनका गांधी ने सवाल किया कि बिना आश्रय के, हटाए गए कुत्तों को सड़कों से हटाकर कहां रखा जाएगा?
बीजेपी की वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और प्रसिद्ध एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों के संबंध में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मेनका गांधी ने कहा कि जब जस्टिस पारदीवाला की तरफ से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी फैसला दिया गया था, तब पूरे देश में उसकी आलोचना हुई थी और सभी ने फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस बार के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आया यह फैसला जस्टिस पारदीवाला के फैसले से भी ज्यादा हास्यास्पद है।
मेनका गांधी ने इस मामले पर हमारा ध्येय स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि हमारा एकमात्र ध्येय सिर्फ आवारों कुत्तों की संख्या में कमी लाना है, ताकि काटने के मामलों में कमी आए। लेकिन, उन्होंने सवाल उठाया कि हमने इस दिशा में अब तक क्या कदम उठाया है? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि कोर्ट ने अपन फैसले में कहा है कि कुत्तों को अस्पताल, बस स्टॉप और कॉलेज से हटाया जाए। लेकिन, जब आप इन कुत्तों को हटाएंगे, तो आप इन्हें कहां पर रखेंगे?
एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने वैज्ञानिक अध्ययन का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि जब हम कुत्तों को एक जगह से उठाकर दूसरे जगहों पर स्थानांतरित करते हैं, तो वो कुत्ते निश्चित तौर पर काटेंगे। उन्होंने दावा किया कि 90 फीसदी लोगों को वो कुत्ते काटते हैं, जिन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है।
भाजपा नेता ने इस हास्यास्पद स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब आप इन कुत्तों को यहां से हटाएंगे, तो निश्चित तौर पर उन्हें सड़क पर रखेंगे, क्योंकि आज भी कुत्तों के लिए कोई आश्रय नहीं है। उन्होंने कहा कि हास्यास्पद स्थिति यह है कि इस पूरे मामले के संदर्भ में आरा और अररिया जैसे शहरों की बात की जा रही है। जब हमारे पास आश्रय नहीं हैं, तो भला उनके पास कहां से आएंगे?
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उन्होंने आशंका जताई कि जब इन शहरों के स्कूलों और अस्पतालों से कुत्तों को निकाला जाएगा, तो वे निसंदेह सड़क पर ही रहेंगे। ऐसी स्थिति में लोग उन्हें डंडों से ही मारेंगे। जब ये कुत्ते फिर से सड़कों पर घूमेंगे, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि वे सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को काटेंगे। इसलिए, उन्होंने मांग की कि इस फैसले पर फिर से विचार करना होगा।






