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Supreme Court की ऐतिहासिक टिप्पणी: “महिलाएं सिर्फ होममेकर नहीं बल्कि नेशन बिल्डर” शादी पर कही ये बड़ी बात
- Written By: प्रिया सिंह
Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने गृहस्थी और जीवन निर्माण में हाउसवाइफ के योगदान को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने महिलाओं को नेशन बिल्डर का एक नया और बहुत बड़ा सम्मान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Supreme Court Verdict ‘Housewives Are Nation Builders’: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं और हाउसवाइफ के सम्मान में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक गृहिणी द्वारा किए जाने वाले घरेलू काम और परिवार की देखभाल की सेवाओं की बहुत बड़ी अहमियत होती है। इस अहमियत को समाज में किसी भी कीमत पर बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने अपने इस बड़े फैसले में बहुत ही सख्त और स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी करने का मतलब घर में नौकरानी लाना बिल्कुल भी नहीं है। घर के जितने भी कामकाज होते हैं, वो पति और पत्नी दोनों की बराबर और साझा जिम्मेदारी होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को सिर्फ होममेकर मानने की पुरानी सोच को पूरी तरह से बदलते हुए उन्हें नेशन बिल्डर का बड़ा दर्जा दिया है।
नेशन बिल्डर हैं महिलाएं
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने विस्तार से कहा कि एक गृहणी का योगदान सिर्फ उसके परिवार की देखभाल तक ही सीमित नहीं होता है। वो देश के समग्र मानव संसाधन और विशाल राष्ट्र निर्माण में भी बेहद अहम और बड़ी भूमिकाएं निभाती हैं। इसलिए महिलाओं को सिर्फ ‘होममेकर’ कहने के बजाय सम्मानपूर्वक ‘नेशन बिल्डर’ कहा जाना चाहिए जिससे उन्हें समाज में उचित दर्जा और सम्मान मिल सके।
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अदालत ने महिलाओं के शानदार करियर और अधिकारों पर भी बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण बात कही है। कोर्ट के अनुसार अगर कोई पत्नी अपने पेशेवर करियर को आगे बढ़ाना चाहती है तो इसे ससुराल वालों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम नहीं कहा जा सकता। महिला की अपनी व्यक्तिगत और स्वतंत्र पहचान शादी के बाद कभी भी खत्म नहीं होती है और इसे पत्नी की क्रूरता नहीं माना जा सकता है।
संपत्ति में मिलेंगे समान अधिकार
सर्वोच्च अदालत ने यह भी माना है कि सभी गृहणियां अपने घर के लिए अपना बेशकीमती समय देती हैं और जीवन में कई तरह के बड़े त्याग करती हैं। इसी महत्वपूर्ण आधार पर उन्हें संयुक्त रूप से खरीदी गई सभी पारिवारिक संपत्तियों में भी पति के बिलकुल समान अधिकार हासिल होते हैं। वो बच्चों के पालन-पोषण और नई पीढ़ी को तैयार करने में एक बहुत ही ज्यादा केंद्रीय और अहम भूमिका निभाती हैं।
मुआवजे के लिए नई गाइडलाइन
हाउसवाइफ की सड़क दुर्घटना में मौत या घायल होने पर मुआवजे के अहम दावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी हादसे के कारण कोई परिवार गृहिणी की सेवाओं से वंचित होता है तो इसका पूरा आकलन होना चाहिए। इसी मकसद से सुप्रीम कोर्ट ने ‘घरेलू देखभाल के नुकसान’ का न्यूनतम मूल्य 30,000 रुपए प्रति माह पूरी तरह से तय कर दिया है।
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अदालत ने मुआवजे के दावों में परिवार और देश के विकास में महिला के भविष्य के योगदान की गणना को बहुत ही ज्यादा जरूरी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से कहा है कि वो खुद ऐसे सभी मामलों की सीधी निगरानी करें। इससे मोटर दुर्घटना के ऐसे सभी मुआवजा दावों का उचित निपटारा एक तय समय सीमा के भीतर तेजी से और आसानी से हो सकेगा।
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