Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

‘सिर्फ झगड़ा करना अपराध नहीं…’, दहेज केस में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा? सास-ससुर को दे दी राहत

Supreme Court: हाल ही में एक फैसले सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में सास-ससुर को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया कि परिवार में होने वाले सामान्य झगड़े कानूनन आपराधिक क्रूरता नहीं माने जाएंगे।

  • Written By: प्रतीक पांडेय
Updated On: Mar 10, 2026 | 08:36 AM

सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स- सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

Supreme Court ruling on Dowry Harassment Case: शादी-ब्याह के रिश्तों में जब दरार आती है, तो कानूनी दांव-पेच अक्सर पूरे परिवार को अपनी चपेट में ले लेते हैं। भारतीय समाज में दहेज उत्पीड़न के मामलों को लेकर कानून सख्त हैं, लेकिन कई बार इन कानूनों की व्याख्या को लेकर अदालतों में लंबी बहस छिड़ जाती है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो न केवल कानूनी नजरिए से महत्वपूर्ण है, बल्कि हर उस परिवार के लिए एक बड़ी सीख भी है जो वैवाहिक विवादों से जूझ रहा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया है कि घर के भीतर होने वाली रोजमर्रा की नोकझोंक को ‘अपराध’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

परिवार में सामान्य कहासुनी अब जेल जाने का कारण नहीं बनेगी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कानून की एक बहुत ही मानवीय और स्पष्ट व्याख्या की है। कोर्ट ने कहा कि केवल झगड़ा करना भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (क्रूरता) या दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।

सम्बंधित ख़बरें

न्यायपालिका में करप्शन वाले चैप्टर पर NCERT ने मांगी माफी, लोगों से किताब लौटाने की अपील

“आधी रात को ड्राफ्ट करते हो ऐसी याचिकाएं?” प्याज-लहसुन पर PIL देख भड़का सुप्रीम कोर्ट, वकील की जमकर लगाई क्लास

संविधान के सामने फेल हुए सरकार के नियम! महिला डॉक्टर को मिला न्याय, HC बोला- मां बनना ‘बॉण्ड’ का उल्लंघन नहीं

महिला दिवस पर स्पेशल वॉकथॉन, CJI सूर्यकांत भी हुए शामिल, कहा- इसका लक्ष्य जागरूकता बढ़ाना

अक्सर देखा गया है कि आपसी मनमुटाव होने पर बहू या उसके परिवार की तरफ से पूरे ससुराल पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक किसी ठोस क्रूरता या विशिष्ट घटना का प्रमाण न हो, तब तक केवल आपसी विवाद के आधार पर सास-ससुर को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।

पटना हाईकोर्ट की ‘गलती’ और सुप्रीम कोर्ट का ‘इंसाफ वाला फैसला’

यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब एक महिला ने अपने पति, सास-ससुर और ननद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। मामला जब पटना हाईकोर्ट पहुंचा, तो वहां एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हुई। हाईकोर्ट ने ननद के खिलाफ तो कार्यवाही रद्द कर दी, लेकिन उन्हीं समान आरोपों के बावजूद सास-ससुर को राहत देने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि हाईकोर्ट ने एक ही जैसे आरोपों के लिए अलग-अलग मानक अपनाए, जो कानूनन सही नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने फैसले में लिखा कि जब आरोप सामान्य और अस्पष्ट हों, तो उनके आधार पर मुकदमा चलाना उचित नहीं है।

कोर्ट में क्यों पिघल गया मामला?

शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि ससुराल वालों ने उससे बीएमडब्ल्यू कार और अन्य कीमती सामान की मांग की और उसे मानसिक रूप से परेशान किया। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर की बारीकी से जांच की, तो पाया कि इसमें किसी भी विशिष्ट घटना, तारीख या स्थान का कोई जिक्र नहीं था। कोर्ट ने गौर किया कि सास-ससुर के खिलाफ लगाए गए आरोप बहुत ही सामान्य थे। इसमें सिर्फ यह कहा गया था कि वे झगड़ा करते थे।

यह भी पढ़ें: लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा आज, ओम बिरला सदन में रखेंगे अपनी बात?

अदालत का मानना था कि धारा 341, 323 और 498A जैसे गंभीर आपराधिक आरोप सिद्ध करने के लिए सिर्फ “झगड़े” की बात कहना काफी नहीं है। किसी व्यक्ति की विशिष्ट भूमिका बताए बिना उसे कानूनी प्रक्रिया में घसीटना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

पति के लिए राहत नहीं, कानून अब भी अपना काम करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने जहां सास-ससुर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, वहीं यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत परिवार के हर सदस्य के लिए नहीं है। पीठ ने साफ तौर पर कहा कि महिला के पति के खिलाफ चल रहा मामला कानून के अनुसार जारी रहेगा। पति पर लगाए गए आरोपों की गंभीरता और उनकी प्रकृति को देखते हुए उसे अपनी बेगुनाही अदालत में साबित करनी होगी।

Supreme court ruling on dowry harassment inlaws relief case

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 10, 2026 | 08:36 AM

Topics:  

  • Dowry harassment
  • Patna News
  • Supreme Court
  • Supreme Court Verdict

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.