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“आपने किसी नौकरानी से शादी नहीं की है” तलाक केस में घर के काम को आधार बनाने पर पति को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

SC Says Wife Not Maid: सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के मामले में कहा पत्नी का घर के काम न करना क्रूरता नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी जीवनसाथी हैं और दोनों को घरेलू कामों में योगदान देना चाहिए।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Mar 20, 2026 | 08:00 PM

सुप्रीम कोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Supreme Court Divorce Case Reaction: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक तलाक के मामले की सुनवाई करते हुए वैवाहिक संबंधों पर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक महिला द्वारा घर के काम न करना या खाना न बनाना क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता है। न्यायाधीशों ने याद दिलाया कि विवाह का आधार जीवनसाथी के बीच बराबरी का संबंध है, न कि घरेलू सहायिका की तलाश करना।

“पत्नी नौकरानी नहीं जीवनसाथी है”

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने सुनवाई के दौरान कड़े शब्दों में कहा कि आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक जीवनसाथी चुन रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक समाज में वैवाहिक जिम्मेदारियां केवल पत्नी के कंधों पर नहीं डाली जा सकती हैं। पति को भी घर के रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि आज का समय पहले जैसा नहीं रहा है और इसमें काफी बदलाव आया है। उन्होंने टिप्पणी की कि कुकिंग, वाशिंग और अन्य घरेलू कामों में पतियों को भी अपना सक्रिय योगदान देने की अब बहुत जरूरत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू कलह के पीछे केवल पत्नी को जिम्मेदार मानना पूरी तरह से गलत दृष्टिकोण है।

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क्या है मामला और आरोप?

इस मामले में याचिकाकर्ता पति ने आरोप लगाया था कि विवाह के केवल एक सप्ताह बाद ही उसकी पत्नी का व्यवहार और रवैया पूरी तरह बदल गया था। उसने दावा किया कि पत्नी उसके और उसके माता-पिता के खिलाफ गंदी भाषा का इस्तेमाल करती थी और खाना बनाने से मना करती थी। पति ने इन्हीं आधारों पर अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।

दूसरी ओर पत्नी ने अपनी दलील में कहा कि वह अपने बच्चे के जन्म के समय ससुराल वालों की सहमति से ही अपने मायके गई थी। उसने आरोप लगाया कि उसके पति और ससुराल के लोग बच्चे के पालना समारोह में शामिल नहीं हुए और नकदी की मांग की। पत्नी के अनुसार उसे दहेज के लिए परेशान किया गया और ससुराल वालों ने उसके मायके से सोने की भी मांग की।

फैमिली कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक

शुरुआत में फैमिली कोर्ट ने पति की दलीलों को स्वीकार करते हुए क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री को मंजूरी दे दी थी। हालांकि पत्नी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जहां हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस तलाक के आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद नाराज पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां जस्टिस मेहता और जस्टिस नाथ सुनवाई कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिश की गई थी लेकिन वह विफल रही। अब अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी और दोनों पक्षों को करीब से सुनने का प्रयास करेगी।

यह भी पढ़ें: Middle East Crisis: भारतीय ऑटो सेक्टर पर मंडराया सप्लाई चेन का खतरा, जानें क्या होगा असर

बदलते समय की मांग

अदालत की यह मौखिक टिप्पणी समाज में घर के कामों के प्रति नजरिया बदलने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन पुरुषों के लिए एक सबक है जो पत्नी को केवल घरेलू कामगार समझते हैं। यह स्पष्ट संदेश देता है कि आधुनिक विवाह में सम्मान और सहयोग ही सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी तत्व हैं।

इस मामले में शामिल दंपति की शादी साल 2017 में हुई थी और वर्तमान में उनका एक आठ साल का बेटा भी है जिसकी जिम्मेदारी भी एक मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि समय बदल गया है और पितृसत्तात्मक सोच को अब वैवाहिक संबंधों में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। घर की जिम्मेदारियों को साझा करना ही एक सफल और सुखी वैवाहिक जीवन का एकमात्र सही रास्ता है।

Supreme court divorce case reaction wife is not a maid husbands must help with daily household chores

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Published On: Mar 20, 2026 | 08:00 PM

Topics:  

  • Court
  • Divorce
  • High Court
  • India
  • Supreme Court

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