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“आधी रात को ड्राफ्ट करते हो ऐसी याचिकाएं?” प्याज-लहसुन पर PIL देख भड़का सुप्रीम कोर्ट, वकील की जमकर लगाई क्लास

Supreme Court Onion Garlic PIL: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में एक ऐसी पीआईएल आई जो चर्चा का विषय बन गई। ये याचिका प्याज और लहसुन से जुड़ी हुई थी। जानिए क्या है पूरा मामला।

  • Written By: प्रतीक पांडेय
Updated On: Mar 09, 2026 | 03:47 PM

सुप्रीम कोर्ट पहुंची प्याज-लहसुन से जुड़ी पीआईएल, फोटो- नवभारत डिजाइन

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Onion Garlic Tamasic Energy Research PIL: देश की सबसे बड़ी अदालत, जहां हजारों गंभीर मामले न्याय की प्रतीक्षा में लंबित हैं, वहां जब अजीबोगरीब और बिना किसी ठोस आधार वाली याचिकाएं पहुंचती हैं, तो जजों का नाराज होना स्वाभाविक है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ के सामने एक ऐसी याचिका आई जिसमें प्याज और लहसुन की ‘ऊर्जा’ की जांच कराने की मांग की गई थी।

चीफ जस्टिस ने न केवल इस याचिका को खारिज किया, बल्कि याचिकाकर्ता वकील को ऐसी फटकार लगाई जो कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

प्याज-लहसुन में ‘नकारात्मक ऊर्जा’: क्या थी यह अनोखी मांग?

सुप्रीम कोर्ट में वकील सचिन गुप्ता ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, जिसमें उन्होंने एक बेहद विचित्र मांग रखी। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ या नकारात्मक ऊर्जा होती है और सरकार को एक विशेष समिति बनाकर इसकी वैज्ञानिक जांच करानी चाहिए। याचिका में तर्क दिया गया कि जैन समुदाय की आहार परंपराओं में प्याज, लहसुन और जमीन के अंदर उगने वाली जड़ों वाली सब्जियों को ‘तामसिक’ मानकर उनसे परहेज किया जाता है।

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सुनवाई के दौरान जब अदालत ने इस पर सवाल उठाए तो याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह एक सामान्य मुद्दा है और उन्होंने उदाहरण के तौर पर गुजरात का एक मामला बताया, जहां कथित तौर पर भोजन में प्याज होने की वजह से तलाक की नौबत आ गई थी। हालांकि, कोर्ट इस तर्क से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हुआ और उन्होंने पूछा कि आखिर वे इस तरह के मुद्दों के जरिए एक पूरे समुदाय की भावनाओं को क्यों प्रभावित करना चाहते हैं।

CJI ने लगाई फटकार, बोले- “आधी रात को ड्राफ्ट करते हो क्या ऐसी याचिकाएं?”

जैसे ही याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलया बागची की पीठ ने कड़ा रुख अपनाया। याचिकाओं की भाषा और उनके पीछे के तर्क को देखते हुए चीफ जस्टिस ने वकील से सीधे शब्दों में पूछा, “आधी रात को ये सब याचिकाएं ड्राफ्ट करते हो क्या?” अदालत ने पाया कि याचिकाएं न केवल अस्पष्ट थीं, बल्कि उनमें कोई ठोस कानूनी आधार भी नहीं था।

कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं दायर करना ‘नॉन-एप्लिकेशन ऑफ माइंड’ यानी बिना सोचे-समझे किया गया काम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट ने वकील को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे वकील न होते, तो उन पर कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जाता। पीठ ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि फिर से ऐसी कोई ‘निराधार’ याचिका लाई गई, तो कोर्ट कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

सिर्फ प्याज-लहसुन ही नहीं, ये याचिकाएं भी हुईं धड़ाम

अदालत में केवल प्याज-लहसुन का मुद्दा ही नहीं था; उसी वकील ने चार अन्य जनहित याचिकाएं भी दायर कर रखी थीं, जिन्हें कोर्ट ने ‘तुच्छ’ और ‘निराधार’ मानकर सिरे से खारिज कर दिया। इन अन्य याचिकाओं में शराब और तंबाकू उत्पादों में हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इसके अलावा, संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण को सुनिश्चित करने और शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा के लिए दिशा-निर्देश बनाने जैसी मांगें भी शामिल थीं।

यह भी पढ़ें: दिल्ली में बेकाबू DTC बस ने सड़क पर लोगों को कुचला, 3 की मौत से गुस्साई भीड़ ने बस को आग के हवाले किया- VIDEO

अदालत ने इन सभी को खारिज करते हुए कहा कि इन याचिकाओं में मांगी गई राहत पूरी तरह से अस्पष्ट है। एक आम नागरिक के लिए यह समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट जैसे मंच का उपयोग केवल उन्हीं विषयों के लिए किया जाना चाहिए जो गंभीर संवैधानिक या कानूनी महत्व के हों। बिना तैयारी और बिना किसी ठोस कानूनी आधार के ऐसी याचिकाओं की बाढ़ से न केवल जजों का समय खराब होता है, बल्कि उन वास्तविक पीड़ितों का इंतजार भी लंबा होता जाता है जो न्याय की आस में वर्षों से कतार में खड़े हैं।

Supreme court dismisses onion garlic tamasic energy pil updates

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Published On: Mar 09, 2026 | 03:47 PM

Topics:  

  • Supreme Court
  • Supreme Court Verdict
  • Today Hindi News

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