मुंबई के पाली हिल में L&T को बड़ा झटका: AM नाइक के 20 साल पुराने बंगले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया आखिरी फैसला
L&T Pali Hill Property Case: सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के आलीशान पाली हिल में स्थित 'हाई ट्रीज' बंगले पर L&T की याचिका खारिज कर दी है। चेयरमैन एमेरिटस एएम नाइक पिछले 20 वर्षों से यहां रह रहे थे।
- Written By: आकाश मसने
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
Supreme Court On L&T Pali Hill Property Case: देश की दिग्गज इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मुंबई के सबसे पॉश इलाकों में शुमार बांद्रा के पाली हिल स्थित एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर बड़ी कानूनी शिकस्त झेलनी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज कर दिया है, जिससे इस बेशकीमती बंगले हाई ट्रीज'(High Trees) को लेकर दशकों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस बंगले में L&T के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान चेयरमैन एमेरिटस ए.एम. नाइक पिछले दो दशकों से अधिक समय से निवास कर रहे थे। कंपनी ने अदालत में दावा किया था कि वह इस संपत्ति की लगभग 30% हिस्सेदारी की मालिक है, इसलिए उसे इस हेरिटेज बंगले का कब्जा मिलना चाहिए।
मालूम हो कि, यह बंगला पाली हिल के पॉश रेजिडेंशियल इलाके में अभी भी मौजूद कुछ हेरिटेज प्रॉपर्टीज में से एक है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रह जाएगा।
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1970 में खत्म हुआ था लीज एग्रीमेंट
दरअसल, यह लड़ाई साल 1970 में तब शुरू हुआ जब इस घर का औपचारिक लीज एग्रीमेंट खत्म हो गया। मकान मालिकों के ग्रुप ने, जिसमें के।सी। कोठारी परिवार के सदस्य और अन्य सह मालिक शामिल थे। उन्होंने टेनेंसी खत्म करने के बाद, 2001 में बांद्रा की स्मॉल कॉजेज कोर्ट में बेदखली की कार्यवाही शुरू की। मुकदमे के दौरान, 2001 में एल एण्ड टी कंपनी ने प्रॉपर्टी में 7% अविभाजित हिस्सा अमर मुनोट (जो अब दिवंगत हैं) उनसे खरीदा लिया।
जो कि प्रॉपर्टी के सह मालिकों में से एक थे। इसके बाद उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 29।5% हो गई। इसी आधार पर, 2017 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले (मंगल बिल्डर्स) का हवाला देते हुए, कंपनी ने तर्क दिया कि वह प्रॉपर्टी की सह मालिक बन गई है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले ही सुनाया था फैसला
इसीलिए उसके खिलाफ बेदखली की कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि एल एण्ड टी सहित सभी सह मालिकों के बीच प्रॉपर्टी के बंटवारे का एक मुकदमा अभी भी लंबित है। वहीं, 27 मार्च, 2026 को दिए अपने फैसले में, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज एमएम सथाये ने इस तर्क को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बेदखली के मुकदमे के दौरान एल एण्ड टी को 7% हिस्सेदारी बेचने वाले सह मालिक की आपत्तियां किसी छिपे हुए मकसद से प्रेरित लगती हैं। इसीलिए वे मुकदमे की वैधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाल सकती। हाई कोर्ट ने यह माना कि 2010 में स्मॉल कॉजेज कोर्ट की अपीलीय बेंच द्वारा एल एण्ड टी की बेदखली का जो आदेश दिया गया था, उसमें कोई गलती नहीं थी।
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कोर्ट ने कंपनी की याचिका को किया खारिज
बॉम्बे हाई कोर्ट ने आगे कहा कि किसी एक सह मालिक की आपत्ति खासकर तब, जब वह किसी किराएदार को फायदा पहुंचाने के मकसद से की गई हो, बाकी सह मालिकों के बेदखली के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकती। इसलिए कोर्ट ने कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, कंपनी को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का मौका देने के लिए कोर्ट ने इस आदेश पर छह हफ्तों के लिए रोक लगा दी थी। इसके बाद एल एण्ड टी ने हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की।
27 अप्रैल को हुई शुरुआती सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस एन।वी। अंजारिया शामिल थे। उन्होंने कहा कि हम इन स्पेशल लीव पिटीशन्स पर सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं। इसलिए, ये सभी स्पेशल लीव पिटीशन्स खारिज की जाती हैं।
