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सहाराश्री पर लक्ष्मी थीं ‘मेहरबान’, समय बदला तो ऐसे रुठी किस्मत
- Written By: विजय कुमार तिवारी

सुब्रत रॉय सहारा (डिजाइन फोटो)
लखनऊ : सहारा समूह (Sahara Group) के प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा (Subrata Roy Sahara) को सहाराश्री (Saharashree) के नाम से जाना जाता है। 14 नवंबर दिन मंगलवार की देर रात इनका निधन हो गया है। वह मुंबई (Mumbai) के एक निजी अस्पताल में अपनी बीमारी का इलाज करा रहे थे। मुंबई के अस्पताल से मौत की खबर मंगलवार की देर रात आयी, जिससे उनके शुभचिंतकों और परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। अब उनके शव को लखनऊ के सहारा शहर स्थित उनके आवास पर लाने की तैयारी की जा रही है, जहां पर उनको अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी।
आपको बता दें कि 1948 में बिहार प्रदेश के अररिया जिले में जन्मे सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय सहारा को देश की बड़ी हस्तियों में गिना जाता था। राजनीतिक गलियारो, बिजिनेस घरानों, फिल्म सितारों व मीडिया जगत में अपनी जबरदस्त पकड़ रखने वाले सुब्रत रॉय सहारा का आखिरी समय काफी विवादित रहा है और उनको जेल की हवा तक खानी पड़ी। इसी दौरान वे बीमार होते चले गए और आखिरकार 14 नवंबर दिन मंगलवार को आखिरी सांस ली।
गोरखपुर जिले से कनेक्शन
सहाराश्री का उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से काफी करीबी रिश्ता था। उन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई और शुरुआती दिनों का कारोबार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से ही शुरू किया था। देखते-देखते वे एक बड़ी कंपनी के मालिक बन गए। बताया जाता है कि महज 2 हजार की छोटी पूंजी से शुरू की गई उनकी फाइनेंस कंपनी का कारोबार 2 लाख करोड रुपए तक पहुंच गया था।
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सुब्रत रॉय सहारा गोरखपुर जिले के बेतियाहाता इलाके में एक वकील साहब के घर में किराए के मकान पर रहते थे। वहीं पर उनके बच्चों का जन्म भी हुआ था और वह धीरे-धीरे उन्होंने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जिसमें फाइनेंस, रियल स्टेट, मीडिया हाउस, हॉस्पिटैलिटी, एयरलाइंस, खेल जगत की गतिविधि जैसे तमाम क्षेत्र शामिल थे। हालांकि कई क्षेत्रों में उनको वो सफलता नहीं मिली जितनी फाइनेंस, रियल स्टेट व मीडिया के क्षेत्र में मिली।

1978 में बना सहारा इंडिया परिवार ग्रुप
सुब्रत रॉय सहारा ने 1978 में सहारा इंडिया परिवार ग्रुप की स्थापना की। बताया जाता है कि सुब्रत रॉय सहारा ने 1978 में अपने एक खास मित्र एसके नाथ के साथ गोरखपुर में फाइनेंस कंपनी की शुरुआत की, जिसका ऑफिस किराए के मकान में था। इसमें केवल दो कुर्सियां लगी होती थीं। वहां पर अक्सर सुब्रत रॉय अपने स्कूटर से आया जाया करते थे। इस फाइनेंस कंपनी की शुरुआत सुब्रत राय सहारा छोटे-छोटे दुकानदारों से मिलकर उनको सेविंग करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। कुछ समय में पूंजी थोड़ी बढ़ी तो उन्होंने किराए के मकान से कुछ दूरी पर कपड़े और पंखे की एक छोटी फैक्ट्री शुरू कर दी। लोग बताते हैं कि वे अपने स्कूटर से ही पंखे और अपने सामान को खुद बचने के लिए बाजार में जाया करते थे। इस दौरान वे लोगों को बचत करने के बारे में जागरूक करते हुए उनको अपने फाइनेंस स्कीम से जोड़ने की पहल भी करते थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुब्रत रॉय सहारा के बातचीत और तौर-तरीके के से लोग प्रभावित थे। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लोग बैंकिंग जरूरत और रोजगार के अवसर के बीच सुब्रत रॉय सहारा की स्कीम को अपनाने लगे। इसी तरह-तरह धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ने लगा। तब 1983-84 में उनके मित्र एसके नाथ ने अलग होकर एक और नई कंपनी बना ली। इससे सुब्रत रॉय काफी दुखी हुए। इसके बाद सुब्रत रॉय सहारा अपनी कंपनी का मुख्यालय लखनऊ में शिफ्ट कर लिया। उसके बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

टाइम मैगजीन ने की सराहना
टाइम मैगजीन ने सुब्रत रॉय सहारा के सहारा इंडिया परिवार को रेलवे के बाद दूसरे सबसे बड़े नियोक्ता के रूप में सम्मान दिया था और उस समय अपनी रिपोर्ट में बताया था कि सहारा परिवार में करीब 12 लाख कर्मचारी काम करते हैं। सुब्रत रॉय सहारा का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट Aamby Valley City महाराष्ट्र में बना था। इसके अलावा 1993 में सहारा एयरलाइंस के क्षेत्र में भी उत्तरी और और सहारा एयरलाइंस की शुरुआत की। लेकिन इसमें अधिक सफलता नहीं मिलने के कारण बाद में उन्होंने जेट एयरवेज को पूरी कंपनी बेचने का ऐलान कर दिया। इसके अलावा 2001 से लेकर 2013 तक सहारा इंडिया इंडियन क्रिकेट टीम का भी स्पॉन्सर भी रहा, जिससे उनकी खेल जगत में भी काफी बड़ी हिस्सेदारी थी। इसके बाद सहारा की टीम ने 2011 में आईपीएल में एंट्री की और पुणे वारियर्स के नाम से अपनी टीम क्रिकेट के मैदान में उतारी।
बेटों की शाही शादी का जश्न
बताया जाता है कि सहारा श्री के नाम से चर्चित सुब्रत रॉय की राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ, क्रिकेट व फिल्म जगत के साथ-साथ तमाम अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिग्गज लोगों के साथ संपर्क थे और अक्सर वह इनको अपने कार्यक्रमों में बुलाया करते थे। आप लोगों को याद होगा कि साल 2004 में हुई सुब्रत राय सहारा के दोनों बेटों के शादी का जश्न हफ्ते भर तक चला था। इस शादी को शताब्दी की सबसे चर्चित शादी में गिना गया। शादी समारोह में लगभग 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे, जिसमें बिजनेस जगत की तमाम हस्तियों के साथ-साथ बॉलीवुड के फिल्मी सितारे, क्रिकेट खिलाड़ी और फैशन जगत के तमाम नामी ग्रामीण लोग शामिल थे। इन सभी लोगों को विशेष विमान से लखनऊ ले जाया गया था।

काफी लंबा चौड़ा था सहारा का कारोबार
कहते हैं कि सहारा ग्रुप की शुरुआत भले को-ऑपरेटिव फाइनेंस से हुई, लेकिन सुब्रत रॉय का विजन काफी बड़ा था। इसीलिए सहारा ग्रुप ने क्रिकेट व हॉकी स्पोर्ट्स टीम को स्पॉन्सर करना शुरू किया। इसके साथ में ही सहारा ग्रुप ने एयरलाइंस सेक्टर में भी हाथ आजमाए। हालांकि बाद में उस बिजनेस को जेट एयरवेज को दिया. इसके अलावा सहारा ग्रुप का बिजनेस रियल एस्टेट सेक्टर, नयी-नयी टाउनशिप बनाने, मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर, हेल्थ केयर सेक्टर, एजुकेशन सेक्टर, होटल इंडस्ट्री, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डी2सी एफएमसीजी और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर तक फैला हुआ था।
ऐसे रुठी किस्मत
लोगों का मानना है कि सहारा ग्रुप के लिए असली समस्या तब शुरू हुई, जब सेबी ने उसको पैसे की हेरा-फेरी के मामले में दबोच लिया। इससे उनकी साख को बड़ा धक्का लगा। इसके चलते सुब्रत रॉय को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में भी उनको कार्रवाई का सामना करना पड़ा और 2 साल से भी ज्यादा वक्त जेल में काटना पड़ा। लोगों का मानना था कि इसी से सहारा का बढ़ता कारोबार धीरे-धीरे ढलने लगा। आजकल ज्यादातर कंपनियों की हालत खस्ता है।
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