इंसान हूं, गलतियां होती हैं: नवभारत कॉन्क्लेव में शिवराज सिंह का छलका दर्द, बोले- राजनीति में ये चीज…
Navbharat Conclave: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवभारत कॉन्क्लेव में अपने मुख्यमंत्री काल के अनुभवों और प्राथमिकताओं पर बेबाक राय रखी। जानिए उन्होंने इस पर क्या कहा?
- Written By: अमन उपाध्याय
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, फोटो- नवभारत
Shivraj Singh Chouhan Navbharat Conclave: केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘नवभारत कॉन्क्लेव’ के मंच से एक राजनेता के बजाय एक संवेदनशील इंसान के रूप में अपनी बात रखी। राजनीति के लंबे सफर और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्णता का दावा करना गलत होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो काम करता है, उससे गलतियां भी होती हैं और वह भी एक इंसान होने के नाते इससे अछूते नहीं हैं।
अधूरी इच्छाओं’ के बारे में खुलकर रखी बात
शिवराज सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और अपनी ‘अधूरी इच्छाओं’ के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते हुए उनका मुख्य ध्यान बिजली, पानी, सड़क और सिंचाई जैसे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर था। उनका मानना था कि प्रदेश की खेती-बाड़ी को बेहतर बनाने के लिए इन बुनियादी सुविधाओं का होना अनिवार्य था।
हालांकि, इसी प्राथमिकता के बीच एक ‘कचोट’ उनके मन में आज भी बनी हुई है। उन्होंने साझा किया कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने की प्रबल इच्छा रखते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में काम थोड़ा देर से शुरू हो पाया।
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नवभारत डिजिटल के सीनियर एडिटर शैलेन्द्र तिवारी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, फोटो- नवभारत
संदीपनी स्कूल का सपना
शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ‘सीएम राइज स्कूल’, जिन्हें अब ‘संदीपनी स्कूल’ के नाम से जाना जाता है, उनके इसी विजन का हिस्सा थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि मुझे कई बार यह कष्ट होता है कि काश यह और पहले सोचते तो और बेहतर परिणाम ला पाते। यह आत्म-चिंतन एक ऐसे राजनेता की छवि पेश करता है जो अपनी सफलता के साथ-साथ अपनी सीमाओं को भी स्वीकार करने का साहस रखता है।
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‘आदमी हूं, आदमी से प्यार करता हूं’
शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली में ‘अपनापन’ और ‘मानवीय दृष्टिकोण’ हमेशा ऊपर रहा है। कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी सामने आई कि उन्होंने जनता और इस संवाद के बीच आने के लिए PMO की एक महत्वपूर्ण बैठक को भी रीशेड्यूल किया। इस पर अपनी सादगी का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि अपनापन ही सबके अंदर हो, बस यह मैं चाहता हूं। ‘आदमी हूं, आदमी से प्यार करता हूं।’
