

Shivraj Singh Chouhan Agriculture Reform Fake Seeds Law: केंद्र सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने और किसानों की समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। 'नवभारत कॉन्क्लेव' में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए गांवों का स्वावलंबी और समृद्ध होना अनिवार्य है। इसी दिशा में सरकार ने नकली कृषि उत्पादों के खिलाफ निर्णायक युद्ध की घोषणा की है।
किसानों की सबसे बड़ी समस्या नकली खाद, घटिया बीज और नकली पेस्टिसाइड है। वर्तमान में लागू 1968 के पेस्टिसाइड एक्ट और सीड एक्ट में दंड के प्रावधान बेहद कम थे, जिससे नकली सामान का व्यापार फलता-फूलता रहा। सरकार अब नया पेस्टिसाइड और सीड एक्ट लाने की तैयारी में है, जिसमें कड़े दंड का प्रावधान होगा।
इसका उद्देश्य नकली उत्पादों के निर्माण और बिक्री को लगभग असंभव बनाना है। सरकार ने इस पर जनता से राय मांगी है और सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सजा के साथ-साथ सरकार तकनीक का सहारा भी ले रही है। इसके लिए 'सारथी पोर्टल' पर ट्रेसेबिलिटी सिस्टम को इतना मजबूत किया जा रहा है कि किसान बीज के पैकेट को स्कैन करके उसके स्रोत, निर्माता और खेत तक की जानकारी हासिल कर सकेगा। यदि उत्पाद में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो अपराधी को पकड़ना और दंडित करना आसान हो जाएगा।
फसलों के साथ-साथ धरती मां के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सरकार ने 'खेत बचाओ' अभियान शुरू किया है। अत्यधिक और असंतुलित फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से मिट्टी कठोर होती जा रही है और मित्र कीट खत्म हो रहे हैं। सरकार अब किसानों को एजुकेट करने का काम करेगी ताकि वे मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार संतुलित मात्रा में ही रसायनों का उपयोग करें।
कृषि क्षेत्र में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है। साल 2014 की तुलना में कुल उत्पादन में 41% की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से चावल के उत्पादन में भारत ने चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में नंबर-1 स्थान हासिल कर लिया है। गेहूं, फलों और सब्जियों के उत्पादन में भी नए रिकॉर्ड कायम हुए हैं।
भारत में औसत लैंड होल्डिंग 0.96 हेक्टेयर है, यानी अधिकांश किसान लघु और सीमांत श्रेणी के हैं। इनकी आय बढ़ाने के लिए सरकार ने 6 मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य सुनिश्चित करना, फसल बीमा के जरिए नुकसान की भरपाई, कृषि विविधीकरण (पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन) और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना। प्राकृतिक खेती से न केवल इनपुट कॉस्ट कम होती है, बल्कि उत्पादों के दाम भी अच्छे मिलते हैं।
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