राहुल से नाराजगी या नई खिचड़ी? मीटिंग छोड़ने के बाद मोदी-RSS की तारीफ, थरूर के सबसे बड़े दांव से हिली कांग्रेस
Shashi Tharoor News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने एक बड़े मुद्दे पर PM मोदी और RSS का बचाव किया है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कांग्रेस सांसद शशि थरूर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Shashi Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अपनी ही पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की खबरों के बीच थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं और समय के साथ आरएसएस ने भी इसे अपना लिया है।
कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल में दर्शकों के एक सवाल का जवाब देते हुए थरूर ने ये बातें कहीं। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब वे केरल चुनाव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई कांग्रेस हाईकमान की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इससे उनके और पार्टी लीडरशिप के बीच अनबन की अटकलें और तेज हो गई हैं, हालांकि उनके कार्यालय ने इसकी अलग वजह बताई है।
मोदी ने संविधान को माना ‘पवित्र किताब’
शशि थरूर ने 2014 के दौर को याद करते हुए कहा कि जब बीजेपी सत्ता में आई थी, तब ऐसी चर्चाएं आम थीं कि वे संविधान को खत्म कर देंगे और एक नया संविधान लाएंगे। खबरें तो यहां तक थीं कि आरएसएस के विचारक गोविंदाचार्य एक नए संविधान का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में अपने पहले भाषण में साफ घोषणा की कि संविधान ही उनकी एकमात्र पवित्र किताब है।
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RSS ने भी अपनाया संविधान: थरूर
थरूर ने जोर देकर कहा कि पीएम मोदी का संदेश साफ था कि वह संविधान को पवित्र मानते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि आरएसएस जैसे संगठन, जिनके वैचारिक पूर्वजों ने कभी इसे साफ तौर पर नकार दिया था, उन्होंने भी अब इसे अपना लिया है। थरूर के मुताबिक, भारतीय संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। इसने न केवल अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की सरकारों के बदलाव को झेला है, बल्कि एक ऐसी पार्टी के सत्ता में आने के बाद भी अपना अस्तित्व बनाए रखा, जिसकी विचारधारा कभी इसके खिलाफ थी।
राहुल गांधी से नाराजगी या कुछ और?
शशि थरूर के इस बयान के सियासी मायने इसलिए भी निकाले जा रहे हैं क्योंकि शुक्रवार को केरल विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर कांग्रेस हाईकमान की अहम बैठक हुई, लेकिन थरूर उसमें शामिल नहीं हुए। इस गैरमौजूदगी ने कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके मतभेद की खबरों को हवा दे दी है। हालांकि, थरूर के कार्यालय ने सफाई दी है कि कोझिकोड में साहित्य महोत्सव में पहले से तय कार्यक्रम के कारण वे बैठक में शामिल होने में असमर्थ थे और इसकी जानकारी पार्टी को दे दी गई थी।
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वहीं, दूसरी तरफ सूत्रों का दावा है कि थरूर की नाराजगी की वजह कुछ और है। बताया जा रहा है कि हाल ही में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद होने के बावजूद राहुल गांधी ने अपने भाषण में थरूर के नाम का उल्लेख नहीं किया। इस बात से वे काफी आहत हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर के नेताओं द्वारा उन्हें बार-बार दरकिनार करने की कोशिशों से भी वे खफा बताए जा रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने रणनीतिक बैठक से दूरी बनाए रखी।
