UGC के नए नियमों पर लगेगी रोक? आज सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई, देश भर में चल रहा आंदोलन
UGC 2026 Regulations: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी। वकील विनीत जिंदल ने याचिका दायर कर इन नियमों को सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण बताया है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (सोर्सः सोशल मीडिया)
Supreme Court on UGC: यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर आज यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ करेगी। अधिवक्ता विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है।
याचिका में दावा किया गया है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से इन नियमों पर रोक लगाने की मांग की है। खास तौर पर UGC रेगुलेशन 2026 के रेगुलेशन 3(c) को लागू करने पर रोक लगाने की अपील की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि 2026 के तहत बनाई गई व्यवस्था सभी जातियों के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
यूजीसी का यह नया नियम सरकार के लिए भी ‘गले की फांस’ बनता नजर आ रहा है। इसे लेकर सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के लोगों में जबरदस्त नाराजगी है, जो अब देशभर में फैलती जा रही है। छात्र और विभिन्न संगठन इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं।
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हालांकि, बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को आश्वासन दिया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और भेदभाव के नाम पर नियमों के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी के साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस नियम के खिलाफ अब तक सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 20 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। वकील विनीत जिंदल की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
किन प्रावधानों पर आपत्ति?
विरोध करने वालों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में भेदभाव रोकने के लिए बनाई जाने वाली ‘इक्विटी कमेटी’ में SC, ST और OBC का प्रतिनिधित्व तो है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं रखा गया है। SC/ST/OBC वर्ग के खिलाफ भेदभाव से बचाव के प्रावधान हैं, लेकिन सामान्य वर्ग के खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ सजा का कोई प्रावधान नहीं होने से नियमों के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। विरोध करने वालों का यह भी कहना है कि सामान्य बातचीत या अकादमिक चर्चा को भी भेदभाव बताकर शिकायत की जा सकती है, जिसे रोकने का कोई स्पष्ट उपाय नहीं है। इससे विश्वविद्यालयों में छात्रों के जातिगत आधार पर बंटने का खतरा भी बताया जा रहा है।
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13 जनवरी को हुए थे नोटिफाई
यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ को अधिसूचित किया था। ये नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। इसके तहत सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में ‘इक्विटी कमेटी’ का गठन अनिवार्य किया गया है।
