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‘ऐसे महिलाओं को कोई नौकरी नहीं…’, पेड पीरियड लीव वाली याचिका पर बोले CJI, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

Supreme Court: याचिकाकर्ता ने दलील दी कि केरल सरकार ने स्कूलों और देश में भी कई प्राइवेट कंपनियों में पेड पीरियड लीव (Menstrual Leave) की व्यवस्था की गई है।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Mar 13, 2026 | 12:43 PM

सर्वोच्च न्यायालय ( सोर्स- सोशल मीडिया)

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Supreme Court on Paid Period Leave: मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अवकाश देने के लिए कानून बनाने की मांग पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। शुक्रवार (13 मार्च 2026) को अदालत ने कहा कि महिलाओं को कमजोर समझना ठीक नहीं है। कोर्ट के अनुसार, यदि पेड पीरियड लीव को अनिवार्य बना दिया गया, तो इससे उल्टा महिलाओं के रोजगार पर असर पड़ सकता है क्योंकि कई नियोक्ता उन्हें नौकरी देने से बच सकते हैं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की सुनवाई सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं अक्सर महिलाओं को कमजोर दिखाने वाली मानसिकता को बढ़ावा देती हैं, जैसे कि मासिक धर्म कोई नकारात्मक घटना हो। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सोच कार्यस्थल पर महिलाओं की क्षमता और पेशेवर विकास को लेकर गलत धारणा बना सकती है।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम आर शमशाद ने दलील दी कि केरल सरकार ने स्कूलों में इस तरह की व्यवस्था लागू की है और कई निजी कंपनियां भी स्वेच्छा से महिलाओं को पीरियड लीव दे रही हैं।

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इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई कंपनी स्वेच्छा से ऐसी सुविधा दे रही है तो यह अच्छी बात है। लेकिन यदि इसे कानून के जरिए अनिवार्य कर दिया गया, तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं, जिससे उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह विचार अच्छा है, लेकिन नियोक्ताओं की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है, जिन्हें पेड लीव देने का दायित्व उठाना होगा।

यह भी पढ़ें- LPG संकट पर सरकार के दावे में कितना दम? कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद, LPG के लिए लोग परेशान

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सरकार को पहले ही ज्ञापन दे चुका है। इसलिए संबंधित प्राधिकरण सभी हितधारकों से चर्चा कर इस विषय पर नीति बनाने पर विचार कर सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अब याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत आने की आवश्यकता नहीं है।

Supreme court rejects plea paid menstrual leave women

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Published On: Mar 13, 2026 | 12:43 PM

Topics:  

  • CJI Surya Kant
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