
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Supreme Court on Stray Dogs: आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की ओर से रखे गए सुझावों पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आप पूरी तरह वास्तविकता से कटे हुए हैं। अस्पतालों में इन कुत्तों को महिमामंडित करने की कोशिश न करें।”
शर्मिला टैगोर इस मामले में आवेदक हैं और उनकी ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि सभी कुत्तों को सड़कों से हटाना इसका समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब विज्ञान और मनोविज्ञान में है और मौजूदा ABC नियमों की समीक्षा आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान वकील ने सुझाव दिया कि आक्रामक और सामान्य कुत्तों की पहचान के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। आक्रामक कुत्तों को मनोवैज्ञानिक उपचार देकर समाज में वापस छोड़ा जा सकता है। वहीं, जिन कुत्तों को सुधारा नहीं जा सके, उन्हें समिति की पहचान के बाद सुलाना पड़े।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “क्या उन्हें ऑपरेशन थिएटर तक भी ले जाया जा रहा था? सड़कों पर घूमने वाले हर कुत्ते की पहचान होना जरूरी है।” कोर्ट ने वकील से दोहराया, “आप हकीकत से पूरी तरह दूर हैं। अस्पतालों में इन कुत्तों का महिमामंडन करने की कोशिश न करें।”
वकील ने आगे कहा कि रंगीन कॉलर लगाकर कुत्तों की पहचान की जा सकती है, जैसे यह पता चल सके कि कौन सा कुत्ता पहले काट चुका है। उन्होंने जॉर्जिया और आर्मेनिया जैसे देशों का उदाहरण दिया। इस पर कोर्ट ने सवाल किया, “उन देशों की जनसंख्या कितनी है? कृपया व्यावहारिक बातें करें, वकील साहब।”
इस मामले में पिछले सात महीनों के दौरान अब तक छह बार सुनवाई हो चुकी है। बीते साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इन जानवरों को तय किए गए शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए।
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7 जनवरी को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ कई याचिकाओं पर सुनवाई की, हालांकि याचिकाओं की कुल संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। यह मामला 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से संज्ञान लेने के बाद शुरू हुआ था, जब दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से फैलने वाली रैबीज बीमारी को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।






