जब के जे येसुदास ने अवॉर्ड लेने से कर दिया था साफ इनकार, जानें दिग्गज गायक की पूरी कहानी

K J Yesudas Award Refusal: के जे येसुदास को जब लगातार सम्मान मिलने लगे तो उन्होंने अवॉर्ड लेने से इनकार कर दिया। उनकी जिंदगी उन्हें सिर्फ गायक नहीं, बल्कि संगीत की जीवित विरासत बनाती है।
k j yesudas birthday story award refusal life story hindi
के जे येसुदास (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

K J Yesudas Birthday: हिंदी और साउथ सिनेमा की दुनिया में जब भी मधुर और शास्त्रीयता से भरपूर आवाज़ की बात होती है, तो के. जे. येसुदास का नाम श्रद्धा के साथ लिया जाता है। साउथ की इस मखमली आवाज़ ने न सिर्फ क्षेत्रीय सिनेमा बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई। एक समय ऐसा भी आया जब येसुदास को इतने सम्मान और अवॉर्ड मिल चुके थे कि उन्हें खुद कहना पड़ा था कि अब मुझे अवॉर्ड मत दीजिए।

के जे येसुदास का जन्म 10 जनवरी 1940 को केरल के एक ईसाई परिवार में हुआ था। उनके पिता ऑगस्टीन जोसेफ जाने-माने संगीतकार और अभिनेता थे। घर का माहौल संगीत से भरा होने के कारण येसुदास का झुकाव बचपन से ही सुरों की ओर हो गया। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने संगीत सीखना नहीं छोड़ा। शुरुआत में पिता के एक मित्र से तालीम ली, लेकिन बाद में उन्होंने प्रसिद्ध गुरु वेच्चोर हरिहरा सुब्रमणिया अय्यर से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की।

येसुदास की प्रतिभा

येसुदास की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज सात साल की उम्र में एक स्थानीय संगीत प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत लिया था। आगे चलकर उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी ही नहीं बल्कि अरबी और संस्कृत जैसी भाषाओं में भी हजारों गीत गाए। उनकी आवाज में भक्ति, प्रेम और करुणा तीनों का अद्भुत संगम सुनाई देता है।

येसुदास ने दिए कई यादगार गीत

हिंदी सिनेमा में येसुदास ने कम समय काम किया, लेकिन इस दौरान उन्होंने ऐसी अमिट छाप छोड़ी, जिसे आज भी संगीत प्रेमी याद करते हैं। बप्पी लहरी, खय्याम, रविंद्र जैन, सलिल चौधरी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ उन्होंने कई यादगार गीत दिए। रविंद्र जैन ने तो एक बार यहां तक कहा था कि अगर उनकी आंखों की रोशनी लौट आए, तो वे सबसे पहले येसुदास को देखना चाहेंगे, जिनकी आवाज इतनी मधुर है।

येसुदास को देश-विदेश में मिले असंख्य सम्मान

येसुदास को देश-विदेश में असंख्य सम्मान मिले, जिनमें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे बड़े पुरस्कार भी शामिल हैं। उन्होंने हजारों मंचों पर परफॉर्म किया और संगीत को एक साधना की तरह जिया। हालांकि, महिलाओं के पहनावे को लेकर दिए गए एक बयान की वजह से वे विवादों में भी रहे, लेकिन उनकी संगीत साधना पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। आज के जे येसुदास सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि संगीत की जीवित विरासत माने जाते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com