राकेश टिकैत ने केंद्र को झुकाने का दिया फॉर्मूला, 2020 की तरह होगा बड़ा आंदोलन…KMP से दिल्ली को घेरने का प्लान
भाजपा और केंद्र सरकार की मुश्किले बढ़ने वाली हैं। किसान आंदोलन को बड़ा और मजबूत करने की तैयारी चल रही है। बता दें कि एक तरफ पंजाब और हरियाणा के बॉर्डर पर किसान...
- Written By: Saurabh Pal
राकेश टिकैत (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः भाजपा और केंद्र सरकार की मुश्किले बढ़ने वाली हैं। किसान आंदोलन को बड़ा और मजबूत करने की तैयारी चल रही है। बता दें कि एक तरफ पंजाब और हरियाणा के बॉर्डर पर किसान दिल्ली कूच को लेकर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा के किसानों में भी असंतोष बढ़ रहा है। पंजाब के किसानों के आंदोलन में हरियाणा के किसान भी शामिल होने को तैयार हैं। जैसे ही पंजाब के किसानों की दिल्ली में एंट्री होगी हरियाणा के किसान करवां में शामिल हो जाएंगे।
वहीं पिछले 10 महीने से दिल्ली जाने को लेकर अड़े किसानों को अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। किसानों द्वारा सरकार से बातचीत की भी अपील की गई है। हालांकि सरकार की तरफ से मंत्री व अधिकारी मीडिया में तो कह रहे हैं कि बातचीत से हल निकलेगा, लेकिन अभी तक बातचीक पहल नही की जा सकी है।
सरकार के खिलाफ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल अब आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। बीते 18 दिनों से वह भूख हड़ताल पर हैं। आज खनौरी बॉर्डर पर डल्लेवाल से मुलाकात करने भारतीय किसान युनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत व किसान नेता लाखोवाल पहुंचे। इस दौरान टिकैत ने डल्लेवाल से मुलाकात के बाद किसान आंदोलन को मजबूत और रणनीति बदलने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग किसान संगठनों को एकत्रित कर 2020 की तरह एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की बात कही है।
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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि किसान संगठनों की एकजुटता के लिए हमने एक समिति का गठन किया है। यह समिति सभी किसान संगठनों से बातचीत करेगी और सभी को एक मंच पर आंदोलन करने के लिए राजी करेगी। टिकैत ने कहा कि जब दिल्ली को घेरा जाएगा तो यह केएमपी से होगा। यह कब और कैसे होगा, यह हम देखेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र की नीति है कि उसके एजेंडे के अनुरूप किसान संगठनों को विभाजित किया जाना चाहिए।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी सीमा पर डेरा डाले हुए हैं। सुरक्षा बलों ने उन्हें दिल्ली जाने से रोक दिया था। किसानों के एक समूह ने 6 दिसंबर और आठ दिसंबर को पैदल दिल्ली में प्रवेश करने का प्रयास किया। हरियाणा में सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। प्रदर्शनकारी किसान 14 दिसंबर को फिर से मार्च करने का प्रयास करेंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि 101 किसानों का जत्था शनिवार को शांतिपूर्ण तरीके से पैदल मार्च करेगा।
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