इफ्तार पार्टी कर गंगा में हड्डियां फेंकने वाले आठों आरोपियों को बेल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी सशर्त जमानत
Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहार के अवशेष फेंकने के आरोपियों को जमानत दे दी है। जानिए कोर्ट ने क्या कहा।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
इलाहाबाद हाई कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Varanasi Iftar Party Boat Incident: जमानत देते समय कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि इस तरह के कृत्य से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है।
गंगा नदी की गरिमा और उसके धार्मिक महत्व को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकना हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। मामले की परिस्थितियों और आरोपियों द्वारा व्यक्त किए गए पछतावे को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत दी है।
भावनाओं को ठेस पहुंचाने का लगा था आरोप
यह मामला 15 मार्च, 2026 का है जब वाराणसी में गंगा नदी के बीच एक नाव पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। शिकायत के अनुसार, इस पार्टी के दौरान मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने मांसाहारी भोजन किया और उसके बचे हुए अवशेषों को गंगा नदी में फेंक दिया। इस संबंध में भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर 16 मार्च को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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क्या बना जमानत का आधार?
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने पांच आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों का यह कृत्य निर्विवाद रूप से हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और इससे समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। कोर्ट ने जमानत देते हुए इन बातों को आधार बनाया-
आरोपियों ने अपने हलफनामे में कृत्य के लिए माफी मांगी है और उनके परिवारों ने भी समाज को पहुंची पीड़ा पर खेद जताया है। आरोपियों ने अदालत में यह वचन दिया है कि वे भविष्य में कभी भी ऐसा कार्य दोबारा नहीं करेंगे। कोर्ट ने पाया कि इन व्यक्तियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
इन आरोपियों को मिली राहत
अदालत ने दो अलग-अलग पीठों के माध्यम से कुल आठ आरोपियों को जमानत दी है। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस को जमानत दी। वहीं, न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने तीन अन्य आरोपियों- मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को जमानत प्रदान की।
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आपको बता दें कि इससे पहले 1 अप्रैल को वाराणसी की सत्र अदालत ने इन आरोपियों की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि आरोपियों की नीयत सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की प्रतीत होती है।
