ECI ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाला! EX CEC कुरैशी की आयोग को चेतावनी; आरोपों को हल्के में न लें
पूर्व मुख्य Election Commissioner एस. वाई. कुरैशी ने Bihar में SIR के तरीके को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है। उन्होंने यह भी कहा की राहुल गांधी के आरोपों पर आयोग जांच कर सब कुछ स्पष्ट कर देना चाहिए।
- Written By: सौरभ शर्मा
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी (फोटो- सोशल मीडिया)
EX Election Commissioner SY Qureshi: कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों का मुद्दा इस समय भारतीय राजनीति में लगातार हलचल मचा रहा है। अब इस मामले में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग के मौजूदा रवैये पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि आयोग को राहुल गांधी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के बजाय उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की तत्काल जांच का आदेश देना चाहिए था। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का यह बयान वर्तमान में चल रहे इस विवाद को और गहरा करता है।
एस. वाई. कुरैशी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए “हाइड्रोजन बम” जैसे शब्द केवल “राजनीतिक बयानबाजी” हो सकते हैं, लेकिन उनके द्वारा उठाई गई शिकायतों को नजरअंदाज कतई नहीं किया जा सकता। उन्होंने विशेष रूप से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तरीके की आलोचना की। कुरैशी ने इसे “भानुमति का पिटारा खोलना” और “मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालना” करार दिया, जो अंततः चुनाव आयोग को ही नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग को इन आरोपों की गंभीरता को समझना चाहिए।
विपक्ष का विश्वास जीतना पहली प्राथमिकता
साल 2010 से 2012 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे कुरैशी ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग को विपक्ष का भरोसा जीतना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा विपक्षी दलों को प्राथमिकता दी है क्योंकि वे कमजोर होते हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में विपक्षी दलों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे, ताकि उनकी शिकायतों को तुरंत सुना जा सके। कुरैशी ने कहा कि आज स्थिति ऐसी है कि 23 विपक्षी दलों को अपनी बात रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जो चिंताजनक है।
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आयोग ने खो दिया निष्पक्ष दिखने का मौका
कुरैशी ने साफ कहा कि आयोग को केवल निष्पक्ष होना ही नहीं, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। राहुल गांधी से शपथपत्र मांगने के बजाय, अगर आयोग तुरंत जांच का आदेश देता, तो इससे सच्चाई सामने आती और संस्था पर लोगों का भरोसा बढ़ता। उन्होंने कहा कि यह एक सुनहरा मौका था जिसे आयोग ने गंवा दिया। गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में राहुल गांधी को सात दिनों के भीतर अपने आरोपों पर शपथपत्र दाखिल करने को कहा था। राहुल ने कर्नाटक की महादेवपुरा सीट पर वोट हेराफेरी का भी आरोप लगाए जो कि पूरे देश में चर्चा का विषय रहा था।
