राघव चड्ढा (सोर्स-एआई जनरेटेड)
Raghav Chadha In Rajya Sabha: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को संसद में आम भारतीयों की तीन “रोजमर्रा की चिंताओं” का मुद्दा उठाते हुए सरकार से व्यावहारिक सुधार लागू करने की मांग की। राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान बोलते हुए, उन्होंने तीन प्रमुख सुझाव दिए।
जिनमें पति-पत्नी के लिए वैकल्पिक संयुक्त आयकर रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था, घायल सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन पर पूरी तरह कर छूट और बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को खत्म करना शामिल थे। चड्ढा ने कहा कि यह तीनों मुद्दे देश के लाखों लोगों को सीधे प्रभावित करते हैं और इनमें नीतिगत बदलाव से व्यवस्था अधिक न्यायसंगत और मानवीय बन सकती है।
राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में फिलहाल पति-पत्नी को अलग-अलग आयकर रिटर्न दाखिल करना पड़ता है। जिससे उन परिवारों को नुकसान होता है जहां दोनों की आय बराबर नहीं होती। चड्ढा के मुताबिक कई घरों में एक व्यक्ति की आय अधिक होती है, जबकि दूसरा बहुत कम कमाता है या कमाता ही नहीं। ऐसे में अधिक कमाने वाले पर कर का बोझ ज्यादा पड़ता है क्योंकि दोनों की आय को जोड़कर टैक्स नहीं लगाया जाता।
Today in Parliament, I delivered a speech titled ’I Do Not Oppose, I Rise to Propose.’ In Parliament today I spoke about three everyday anxieties of ordinary Indians and proposed practical reforms. (1) Allow optional Joint Filing of Income Tax Returns so married couples with… pic.twitter.com/lt4UOAQe8S — Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 16, 2026
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और जर्मनी जैसे कई देशों में पति-पत्नी को संयुक्त रूप से आयकर दाखिल करने की अनुमति है, जिससे टैक्स स्लैब का बेहतर लाभ मिलता है और परिवार पर कुल कर बोझ कम हो सकता है। उनके अनुसार भारत में भी वैकल्पिक संयुक्त फाइलिंग लागू करने से परिवारों को आर्थिक रूप से मदद मिलेगी।
दूसरा मुद्दा उठाते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि पहले सेवा के दौरान घायल सैनिकों को मिलने वाली दिव्यांगता पेंशन पूरी तरह से आयकर मुक्त होती थी। उन्होंने कहा कि हाल में नीति में बदलाव के बाद पूर्ण कर छूट केवल उन सैनिकों को मिलती है जिन्हें चोट के कारण सेवा से मेडिकल आधार पर बाहर कर दिया जाता है। उनके मुताबिक जो सैनिक चोट के बावजूद सेवा जारी रखते हैं या बाद में सामान्य रूप से सेवानिवृत्त होते हैं, उन्हें अपनी दिव्यांगता पेंशन के कुछ हिस्से पर कर देना पड़ता है।
When a soldier guards our borders, he does not calculate his sacrifice in tax slabs. He spends Diwali in a bunker. Eid on the border. Misses family milestones. And sometimes he loses a part of his body in service of the nation. That disability pension is not income. It is… pic.twitter.com/A5p5uOKQdh — Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 16, 2026
इसके अलावा उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की सेवा करते हुए लगी चोटों पर मिलने वाले लाभों को सैनिक की सेवा स्थिति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। चड्ढा ने सरकार से सेवा से जुड़ी चोटों पर मिलने वाली दिव्यांगता पेंशन को सभी सैनिकों के लिए 100 प्रतिशत आयकर मुक्त करने की मांग की।
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तीसरा मुद्दा उठाते हुए राघव चड्ढा ने न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बैंक 50 से 600 रुपये तक का जुर्माना वसूलते हैं और इस पर 18 परसेंट जीएसटी भी लगता है। इससे गरीब, ग्रामीण और छोटे खाताधारक ज्यादा प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि बेसिक सेविंग अकाउंट पर यह जुर्माना पूरी तरह समाप्त होना चाहिए।