अरविंद केजरीवाल, फोटो- सोशल मीडिया
Delhi Excise Policy Case: दिल्ली की सियासत और कानूनी गलियारों में आज हलचल तेज है। साल 2021-22 की आबकारी नीति को लेकर चल रहे विवाद में आज यानी 16 मार्च का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। पिछले कुछ दिनों से शांत दिख रहे इस मामले में अचानक उस वक्त उबाल आ गया, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया।
आज अदालत की बेंच यह तय करेगी कि निचली अदालत से इन सभी दिग्गजों को जो ‘क्लीन चिट’ मिली थी, वह बरकरार रहेगी या फिर जांच एजेंसियों की दलीलों के बाद यह कानूनी लड़ाई एक नया मोड़ लेगी। मुख्यमंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री के लिए आज की कार्यवाही उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से भी काफी संवेदनशील मानी जा रही है।
इस पूरे मामले की जड़ 27 फरवरी 2026 को आए राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश में है, जिसने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 लोगों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। निचली अदालत ने तब सीबीआई की जांच को ‘निराधार’ बताते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई थी।
हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आरोपियों के आरोपमुक्त होने के आदेश पर पूरी तरह रोक तो नहीं लगाई, लेकिन इसे प्रभावी मानने से भी इनकार कर दिया था। आज की सुनवाई में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच यह देखेगी कि क्या वाकई सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत हैं या फिर निचली अदालत का फैसला ही अंतिम सत्य बनेगा।
सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की ओर से अदालत में इस मामले को ‘सबसे बड़े भ्रष्टाचार घोटालों में से एक’ करार दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस नीति को इस तरह तैयार किया गया था कि कुछ खास निजी कारोबारियों को फायदा पहुंचे, जिसमें 12 प्रतिशत का निश्चित मुनाफा तय किया गया और उसमें से 6 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के तौर पर लिया गया।
सीबीआई के अनुसार, करीब 90 से 100 करोड़ रुपये की रिश्वत की व्यवस्था की गई थी, जिसमें से 44.54 करोड़ रुपये गोवा विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल किए गए। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि करीब 36 लोगों ने 170 से ज्यादा मोबाइल फोन बदले या नष्ट कर दिए ताकि डिजिटल साक्ष्य खत्म किए जा सकें। आज इन तथ्यों पर हाई कोर्ट की टिप्पणी मामले की दिशा बदल सकती है।
आम आदमी पार्टी का पक्ष रखते हुए सांसद संजय सिंह ने पहले ही कहा था कि सीबीआई को अभी तक हाई कोर्ट से कोई ‘स्टे’ नहीं मिला है, जो उनके लिए एक बड़ी नैतिक जीत है। लेकिन दूसरी तरफ, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रवर्तन निदेशालय के धनशोधन मामले की कार्यवाही को तब तक स्थगित रखेगी जब तक हाई कोर्ट में यह वर्तमान सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।
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इसका मतलब यह है कि अगर आज हाई कोर्ट सीबीआई की दलीलों से सहमत होती है, तो इन सभी नेताओं की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि इस स्तर पर अदालत केवल यह देखती है कि क्या मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त ‘संदेह’ मौजूद है, न कि गवाहों की विश्वसनीयता की गहन जांच की जाती है।