Explainer: आखिर क्यों फेल हुआ PSLV? 300 करोड़ की चपत, सैटेलाइट का भविष्य और इसरो के 'वर्कहॉर्स' की पूरी कहानी

ISRO Mission Failure: कोई मिशन फेल होने के बाद रॉकेट और सैटेलाइट का क्या होता है? इससे पहले PSLV फेल हुआ है या नहीं? इस मिशन के फेलियर से इसरो को कितने का नुकसान हुआ? चलिए जानते हैं इन सवालों के जवाब
pslv C62 mission failure explained 300 crore setback satellite fate and isro analysis
सांकेतिक तस्वीर (AI जनरेटेड)
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PSLV-C62 Failure Explained: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए 2026 की शुरुआत निराशाजनकर रही। इसरो का पहला मिशन 'PSLV-C62' फेल हो गया है। यह रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 16 सैटेलाइट लेकर उड़ा था। इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया।

इस मिशन के फेल होते ही तमाम सवाल उठ खड़े हुए हैं। आपके जेहन में भी यह सवाल जरूर आ रहे होंगे कि आखिर यह मिशन फेल क्यों हुआ? मिशन फेल होने के बाद रॉकेट और सैटेलाइट्स का क्या होता है? इससे पहले PSLV फेल हुआ है या नहीं? साथ ही इस मिशन के फेलियर से इसरो को कितने का नुकसान हुआ? तो चलिए इन सवालों के जवाब जानते हैं....

क्यों फेल हुआ PSLV-C62 मिशन?

मिशन की शुरुआत बिल्कुल सटीक रही। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के बाद, रॉकेट के शुरुआती दो चरणों ने उम्मीद के मुताबिक काम किया। लेकिन मिशन के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई। इसरो ने आधिकारिक रूप इसे सफल या असफल नहीं घोषित किया है। लेकिन आमतौर पर तीसरे चरण में गड़बड़ी आने पर मिशन को फेल ही माना जाता है।

कैसे फेल हो गया इसरो का 'वर्कहॉर्स'?

दरअसल, एक रॉकेट में लाखों पुर्जे होते हैं। जिनमें वाल्व, सेंसर, सर्किट और फ्यूल पंप आदि शामिल होता है। इनमें से किसी एक का भी मिलीसेकंड के लिए फेल होना पूरे मिशन को बर्बाद कर सकता है। PSLV-C62 के मामले में भी, 99% सिस्टम सही काम कर रहे थे, लेकिन वह 1% हिस्सा (संभवतः कोई सेंसर या वाल्व) धोखा दे गया होगा।

बड़े मिशनों को अंजाम दे चुका है PSLV

PSLV रॉकेट को इसरो का 'वर्कहॉर्स' जाता है। इसने अब तक 63 उड़ानें पूरी की हैं। इनमें चंद्रयान-1, मंगलयान (MOM), आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे बड़े मिशन शामिल हैं। साल 2017 में PSLV ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट्स लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।

सोयुज-फाल्कन भी हो चुके हैं फेल

आपको यह भी बताना जरूरी है कि दुनिया का कोई भी रॉकेट 100% विश्वसनीय नहीं होता। अमेरिका के फाल्कन-9 या रूस के सोयुज जैसे रॉकेट भी कई बार फेल हो चुके हैं। PSLV की विश्वसनीयता बहुत उच्च है, लेकिन तकनीकी विफलता की संभावना हमेशा बनी रहती है।

रॉकेट और सैटेलाइट्स का क्या होगा?

रॉकेट में लगे ऑनबोर्ड कंप्यूटर और सेफ्टी सिस्टम लगातार उसकी दिशा, स्पीड और ऊंचाई पर नज़र रखते हैं। अगर रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक जाता है और ज़मीन या आबादी वाले इलाकों के लिए खतरा बनता है, तो रेंज सेफ्टी ऑफिसर उसे नष्ट कर देता है। यदि रॉकेट अधिक ऊंचाई पर फेल होता है तो समुद्र में गिर जाता है।

PSLV C62 Mission Infographic
पीएसएलवी सी62 मिशन इन्फोग्राफिक (AI जनरेटेड)

बात करें रॉकेट पर के साथ अंतरिक्ष में जा रहे सैटेलाइट्स की तो ये आम तौर पर पृथ्वी के वायुमंडल में घर्षण के कारण जल जाते हैं। जो मलबा जलने से बच जाता है वह मलबे के रूप में समुद्र में गिर जाता है। इस मलबे को 'Space Debris' भी कहा जाता है। साफ शब्दों में कहें तो मिशन फेल होने के बाद कुछ भी रिकवर होने की संभावना न के बराबर होती है।

मिशन फेलियर से कितना नुकसान?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने PSLV-C62 मिशन की सही कीमत नहीं बताई है। हालांकि, पिछले PSLV लॉन्च की लागत आमतौर पर मिशन की जटिलता, पेलोड की संख्या और कमर्शियल कंपोनेंट्स के आधार पर इसकी लागत लागत 250 करोड़ से 300 करोड़ के बीच मानी रही है।

और कब-कब फेल हुआ है PSLV?

इसरो का इतिहास संघर्ष और सफलता दोनों का गवाह रहा है। इसरो के संस्थापक PSLV-C62 से पहले भी कुछ मिशन असफल हुए हैं, जिन्होंने इसरो को और बेहतर बनाना सिखाया। पहला 'सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल' (SLV) बनाने वाले वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने खुद 'FAIL' को 'First attempt in learning' यानी सीखने का पहला प्रयास कहा था।

  • PSLV-D1 (1993): PSLV की यह पहली ही उड़ान थी। सॉफ्टवेयर में गलती के कारण यह मिशन फेल हो गया था और रॉकेट समुद्र में गिर गया था। लेकिन यहां से 'इसरो' को ऐसी सीख मिली कि उसने लगातार PSLV रॉकेट के जरिए 39 मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
  • PSLV-C39 (2017): यह एक बहुत ही दुर्लभ विफलता थी। रॉकेट ने सही उड़ान भरी, लेकिन सैटेलाइट के ऊपर लगा सुरक्षा कवच (Heat Shield) अलग नहीं हुआ। इसके कारण सैटेलाइट (IRNSS-1H) अंदर ही फंस गया और मिशन फेल हो गया।
  • PSLV-C61 (2025): पिछले साल 18 मई को भी ISRO का PSLV-C61 मिशन तकनीकी खराबी के कारण तीसरी स्टेज में ही फेल हुआ था। इस मिशन में EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को 524 किमी की सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था।
  • PSLV-C62 (2026): यह विफलता निश्चित रूप से दुखद है, लेकिन यह अंतरिक्ष विज्ञान का एक हिस्सा है। इसरो के अध्यक्ष ने कहा है कि वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि गलती का सटीक कारण पता चल सके। यह एक तरह से आगे के बड़े मिशनों के लिए सीख साबित होगा।

इतिहास गवाह है कि इसरो अपनी गलतियों से बहुत तेजी से सीखता है। 1993 में पहली विफलता के बाद PSLV ने लगातार 39 सफल मिशन दिए थे। 2017 की विफलता के बाद भी उसने कई सफल उड़ानें भरीं। यह विफलता इसरो के कदमों को नहीं रोकेगी, बल्कि भविष्य के गगनयान और चंद्रयान-4 जैसे मिशनों के लिए सुरक्षा मानकों को और बेहतर करने का काम करेगी।

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