1947 का धोखा और जिन्ना की चाल...कैसे पाकिस्तान का गुलाम बना बलूचिस्तान? पढ़िए 'खूनी इतिहास' की इनसाइड स्टोरी

Balochistan Slavery and Rebellion Story: पाकिस्तान में मचे हड़कंप के बीच चौतरफा यह सवाल गूंज रहा है कि बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई के पीछे क्या कहानी है? यह लड़ाई कब से चल रही है?
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बलूचिस्तान की गुलामी और आजादी के संघर्ष की कहानी (फोटो-AI)
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Baluchistan Struggle for Freedom: आजाद बलूचिस्तान के लिए लड़ने वाले लड़ाकों ने हाल ही में पाकिस्तान में कई जगहों पर एक साथ हमले किए। इन हमलों में उन्होंने पाकिस्तानी मिलिट्री बेस और सिक्योरिटी फोर्स के जवानों को निशाना बनाया। बलोच लड़ाकों के ताजातरीन हमलों में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने इसे 'ऑपरेशन हेरोफ 2.0' बताया है।

पाकिस्तान में मचे हड़कंप के बीच चौतरफा यह सवाल गूंज रहा है कि बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई के पीछे क्या कहानी है? यह लड़ाई कब से चल रही है? बलूच लोगों की क्या शिकायतें हैं? आपके भी जेहन में ऐसे ही सवाल उछलकूद कर रहे होंगे! तो चलिए इन सभी सवालों का जवाब तलाशने का प्रयास करते हैं...

कब शुरू हुई आजाद बलूचिस्तान की लड़ाई?

साल 1947 में भारत के बंटवारे के साथ पाकिस्तान अस्तित्व में आया। ठीक उसी वक्त से बलूचिस्तान के लोग आजादी के लिए आवाज उठा रहे हैं। यानी कि 1947 से शुरू हुई लड़ाई अब तक समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। इतना ही नहीं यह समय के साथ और भयंकर रूप अख्तियार करती जा रही है।

1947 के पहले कैसा था बलूचिस्तान का रूप?

1947 से पहले बलूचिस्तान में मकरान, लास बेला, खारान और कलात ना की चार रियासतें थीं। इन रियासतों के शासक ब्रिटिश सरकार के वफादार थे। इनमें से कलात का शासक सबसे ताकतवर था। जैसे-जैसे अंग्रेजों के भारत छोड़ने का समय करीब आया, कलात के आखिरी शासक अहमद यार खान ने एक आजाद बलूच राज्य की वकालत करनी शुरू कर दी।

जिन्ना ने अहमद यार खान को क्यों दिया धोखा?

अहमद यार खान को उम्मीद थी कि मुहम्मद अली जिन्ना के साथ उनकी दोस्ती उन्हें पाकिस्तान में शामिल होने के बजाय एक अलग राज्य हासिल करने में मदद करेगी। 11 अगस्त 1947 जब पाकिस्तान ने कलात खुद में मिलाने की बजाय उसके साथ दोस्ती का समझौता किया। लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ने इसका विरोध कर दिया। क्योंकि उन्हें डर था कि एक आज़ाद कलात से इस इलाके में सोवियत प्रभाव बढ़ जाएगा।

Balochistan slavery and rebellion story
बलूचिस्तान की गुलामी और बगावत की कहानी (इन्फोग्राफिक- AI)

जिन्ना भी पलट गए जिससे 'कलात' के लिए हालात और भी मुश्किल हो गए। क्योंकि उसके कंट्रोल वाली तीन रियासतों के शासक पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे। अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने भी अपना रुख बदल लिया और कलात पर पाकिस्तान में शामिल होने का दबाव डाला। जिसके बाद 17 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सरकार ने कलात के कंट्रोल वाली तीन रियासतों पर कब्जा कर लिया कर लिया।

कैसे पाकिस्तान का गुलाम बना बलूचिस्तान?

इस घटना के बाद अहमद यार खान पर काफी दबाव पड़ा। इसी बीच ऑल इंडिया रेडियो पर अफवाहें फैलीं कि अहमद यार खान भारत में शामिल होना चाहते हैं। नतीजतन 26 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान पहुंच गई। दबाव में आकर खान ने 27 मार्च को पाकिस्तान में शामिल होने के दस्तावेज पर साइन कर दिए।

1947 के बाद पांच बार छिड़ चुका हैं संग्राम

उसी साल जुलाई में अहमद यार खान के भाई प्रिंस अब्दुल करीम ने इस समझौते के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इसी विद्रोह ने पहले बलूचिस्तान स्वतंत्रता संघर्ष की शुरुआत हुई। तब से बलूचिस्तान की आजादी के लिए पांच बार संग्राम हो चुका है। यह लड़ाइयां 1948, 1958-59, 1962-63, और 1973-1977 में हुईं। मौजूदा संग्राम 2003 में शुरू हुआ था जो अब तक जारी है।

अब तक हजारों निर्दोष बलूचों ने गंवाई जान

पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वालों को बेरहमी से दबाने का आरोप है। पाकिस्तानी सेना पर बलूच लोगों को अगवा करने, यातना देने, मनमाने ढंग से गिरफ्तार करने और मारने का आरोप है। कहा जा रहा है कि 1948 से अब तक हजारों निर्दोष बलूच नागरिकों को मार दिया गया है और हजारों लोग लापता हो गए हैं।

साल 2005 में बलूचिस्तान की आजादी का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया जब पाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री और बलूचिस्तान के पूर्व गवर्नर नवाब अकबर खान बुगती ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ हथियार उठा लिए। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार के सामने 15 मांगें रखीं, जिसमें यह मांग भी शामिल थी कि बलूचिस्तान के लोगों को अपने प्राकृतिक संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण मिलना चाहिए।

परवेज मुशर्रफ ने करवाई बुगती की हत्या!

इस मांग के बाद बलूचिस्तान के लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना के साथ टकराव हुआ, लेकिन अगले ही साल बुगती मारे गए। तत्कालीन सेना प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ पर इस हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा। इस हत्या से पाकिस्तान के खिलाफ बलूचिस्तान के लोगों में और गुस्सा बढ़ गया और एक अलग बलूचिस्तान के लिए चल रहे संघर्ष को और हवा मिली।

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अकबर खान बुगती (सोर्स- सोशल मीडिया)

बलूचिस्तान के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान में उनकी लगातार उपेक्षा की जाती है। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों से भरपूर है, फिर भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान सिर्फ चार प्रतिशत है। बलूचिस्तान के लोगों का यह भी आरोप है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का काम अपने सहयोगी चीन को सौंप दिया है।

1947 से आजादी की राह देख रहा बलूचिस्तान

बलूचिस्तान के लोग 1947 से आजादी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों और सशस्त्र संघर्ष दोनों के जरिए इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तानी सेना और सरकार एक अलग बलूचिस्तान की उनकी मांग को मानने को तैयार नहीं हैं। यह लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष पाकिस्तानी सरकार के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है।

बीते साल BLA ने हाईजैक की जाफर एक्सप्रेस

हाल के वर्षों में बलूच लिबरेशन फ्रंट और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे संगठनों ने बार-बार पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया है। पिछले साल भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने जाफर एक्सप्रेस नाम की एक ट्रेन को हाईजैक कर लिया था। हालांकि पाकिस्तानी सेना ट्रेन को उनके चंगुल से छुड़ाने में कामयाब रही थी।

बलूचिस्तान की आजादी होगी पाक का अंत!

पाकिस्तान की कुल जमीन के 44% हिस्से पर बलूचिस्तान है। ऐसे में अगर बलूचिस्तान आजाद हो जाता है, तो इससे पाकिस्तान का आकार काफी कम हो जाएगा और वह अपने प्राकृतिक संसाधनों पर से कंट्रोल खो देगा। इसी वजह से पाकिस्तान किसी भी कीमत पर एक आजाद बलूचिस्तान बनने से रोकने के लिए पक्का इरादा रखता है।

कब पूरा होगा आजाद बलूचिस्तान का ख्वाब?

दूसरी तरफ बलूच विद्रोही और लड़ाके भी अपनी धुन के पक्के हैं। उन्होंने भी अपना हौसला नहीं खोया है और आजादी के लिए अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं। लड़ाकों को यह उम्मीद है कि वह कभी न कभी कामयाब जरूर होंगे। ऐसे में देखना अहम होगा कि क्या एक अलग देश का उनका सपना कभी पूरा हो पाएगा?

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