वेनेजुएला जैसा हाल भारत का भी हो सकता…अमेरिकी कार्रवाई पर आखिर कांग्रेस नेता क्यों ऐसी चिंता जताई
Nicolas Maduro को आतंकवाद के आरोपों मेंअमेरिकी अदालत में पेश किया गया। इस मसले पर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आई, जिसमें यह तक कह दिया गया कि ऐसा भारत के साथ भी हो सकता है।
- Written By: सौरभ शर्मा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण (फोटो- सोशल मीडिया)
Prithviraj Chavan statement on Nicolas Maduro arrest: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी गिरफ्तारी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने सीधी आशंका जताई है कि जो आज वेनेजुएला में हुआ, वैसा कल भारत के साथ भी हो सकता है। चव्हाण ने इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर भारत सरकार की खामोशी की कड़ी आलोचना की। उनका स्पष्ट कहना है कि एक चुने हुए राष्ट्रपति को दूसरे देश में घुसकर किडनैप करना यूएन चार्टर के नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
कूटनीतिक रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने याद दिलाया कि यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास मामले में भी भारत ने कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया था। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि क्या हम अमेरिका से इतना डर गए हैं कि उनकी गलत कार्रवाई की आलोचना भी नहीं कर सकते। जहां रूस और चीन ने खुलकर अमेरिका के इस कदम का विरोध किया, वहीं भारत ने चुप्पी साधे रखी। चव्हाण के अनुसार यह भविष्य के लिए किसी भी देश के लिए चिंता की बात है।
अदालत में मादुरो की दलील
निकोलस मादुरो को मादक पदार्थों से जुड़े आतंकवाद के गंभीर आरोपों में सोमवार को पहली बार अमेरिकी अदालत में पेश किया गया। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, मादुरो ने जज के सामने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि वह एक सभ्य इंसान हैं और अपने देश के राष्ट्रपति हैं। इन आरोपों का आधार ट्रंप प्रशासन के समय तैयार किया गया था, जिसका इस्तेमाल अब उन्हें पकड़ने और न्यूयॉर्क लाने के फैसले को सही ठहराने के लिए किया जा रहा है। भारत ने भी अमेरिका की इस कार्रवाई पर चिंता जरूर जाहिर की थी, लेकिन चव्हाण का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह एक संप्रभु राष्ट्र के नेता के साथ हुआ व्यवहार है।
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वकीलों की नई रणनीति
सोमवार को तड़के ही निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को ब्रुकलिन जेल से भारी सुरक्षा के बीच मैनहट्टन कोर्टहाउस ले जाया गया। वहां उन्हें हिरासत में रखा गया है। अब उम्मीद की जा रही है कि मादुरो के वकील उनकी गिरफ्तारी को कानूनी चुनौती देंगे। उनका तर्क है कि एक संप्रभु देश का राष्ट्राध्यक्ष होने के नाते मादुरो को इस तरह के मुकदमे और अभियोजन से छूट मिलनी चाहिए। वकीलों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाए जाएंगे। फिलहाल इस घटना ने दुनिया भर की राजनीति में हलचल मचा दी है और भारत में भी विपक्षी दल ने इसे लेकर सरकार को घेरा है।
