‘साइलोस’ छोड़ ‘सिनर्जी’ की राह पर बढ़ा देश, 146 करोड़ नागरिकों के लिए मोदी सरकार का नया विजन
Navbharat Conclave: अनुप्रिया पटेल ने मोदी सरकार के 12 वर्षों के शासन को देश के लिए परिवर्तनकारी युग बताया है और कहा कि 2047 तक भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य है।
- Written By: अमन उपाध्याय
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, फोटो- नवभारत
Anupriya Patel Navbharat Conclave: हाल ही में दिल्ली में आयोजित ‘नवभारत कॉन्क्लेव’ में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार ने शासन के 12 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस लंबी अवधि को देश के इतिहास में एक बड़े परिवर्तनकारी युग के रूप में देखा जा रहा है। इन 12 वर्षों में सरकार ने न केवल नई नीतियां बनाई हैं, बल्कि देश की प्रशासनिक कार्य संस्कृति में भी बुनियादी और क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।
विशेष रूप से स्वास्थ्य के क्षेत्र में आई प्रगति इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही दिशा और दृढ़ इच्छाशक्ति से कितने बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। यह 12 वर्षों का सफर भारत की उपलब्धियों का एक ऐसा अध्याय है, जिसने भविष्य के स्वर्णिम भारत के लिए एक मजबूत और टिकाऊ आधार तैयार कर दिया है।
कार्य संस्कृति में क्रांतिकारी बदलाव
उन्होंने इस पर बोलते हुए आगे कहा कि दशकों से भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी बाधा यह रही थी कि विभिन्न मंत्रालय और सरकारी विभाग एक-दूसरे से पूरी तरह कटे हुए ‘साइलोस’ में काम करते थे। इसका अर्थ यह था कि हर विभाग के अपने अलग लक्ष्य होते थे और उनके बीच राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की भारी कमी महसूस की जाती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुरानी और सुस्त व्यवस्था को पहचानते हुए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ का एक अनूठा और प्रभावी दृष्टिकोण पेश किया है।
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इस मॉडल के तहत सरकार के सभी अंगों को एक साझा सूत्र में पिरोया गया है। सरकार के भीतर यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भले ही अलग-अलग मंत्रालयों की कार्यप्रणाली या रास्ते भिन्न हो सकते हैं, लेकिन उन सभी की मंजिल और अंतिम लक्ष्य एक ही है देश के 146 करोड़ नागरिकों का सर्वांगीण कल्याण और सेवा।
जब सरकारी मशीनरी के सभी हिस्सों ने आपसी सामंजस्य के साथ काम करना शुरू किया, तो इसका सकारात्मक असर हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। यह आपसी सहयोग और ‘सिनर्जी’ ही आज के नए भारत की असली पहचान बन गई है।
नवभारत कॉन्क्लेव में अनुप्रिया पटेल, फोटो- नवभारत
‘होल ऑफ सोसाइटी’ का नया मंत्र
सरकार का यह दृढ़ विश्वास है कि केवल सरकारी प्रयासों या योजनाओं से ‘विकसित भारत‘ का विशाल सपना पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकार ने ‘होल ऑफ सोसाइटी’ के दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी बड़े राष्ट्रीय मिशन की सफलता देश के नागरिकों की सक्रिय भागीदारी यानी ‘जन-भागीदारी’ पर ही टिकी होती है।
आज जब हम आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को दुनिया के अग्रणी विकसित देशों की कतार में खड़ा करने का लक्ष्य रखते हैं, तो इसमें देश के प्रत्येक नागरिक का संकल्प और प्रयास अनिवार्य रूप से सम्मिलित है।
बदलती वैश्विक छवि
एक लंबा दौर वह भी था जब भारत को केवल एक ‘विकासशील अर्थव्यवस्था’ के रूप में देखा जाता था और हम स्वयं भी इसी श्रेणी में रहकर अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट हो जाया करते थे। पहले की सरकारों के दौरान बड़े वैश्विक लक्ष्यों को लेकर उस तरह की दृढ़ता या विजन का अभाव दिखता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश की यह सोच पूरी तरह से बदल चुकी है।
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आज भारत दुनिया के किसी भी विकसित देश से पीछे रहने को कतई तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की निरंतर बढ़ती साख और प्रभाव इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक पटल पर एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है।
