
अभिजीत मुखर्जी व शर्मिष्ठा मुखर्जी (सोर्स-सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: हाल ही में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और स्मारक को लेकर उठे विवाद के बीच प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने कांग्रेस पर सवाल उठाए थे। शर्मिष्ठा ने कहा था कि जब उनके बाबा का निधन हुआ तो क्या कांग्रेस को ये सब बातें याद नहीं आईं। उनका अंतिम संस्कार कैसे किया जाना चाहिए और कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक कब बुलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि ‘जब मेरे बाबा का निधन हुआ तो कांग्रेस ने शोक सभा के लिए CWC की बैठक बुलाने की भी जहमत नहीं उठाई।’
प्रणब की बेटी ने कहा था कि एक वरिष्ठ नेता ने मुझसे कहा था कि राष्ट्रपतियों के लिए ऐसा नहीं किया जाता। यह पूरी तरह बकवास है, क्योंकि बाद में मुझे बाबा की डायरी से पता चला कि केआर नारायणन के निधन पर CWC की बैठक बुलाई गई थी और शोक संदेश खुद बाबा ने तैयार किया था।’ वहीं शर्मिष्ठा के भाई यानी प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत ने अलग राय जाहिर की है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप तो नहीं लगाया लेकिन अपने पिता की सफलता का श्रेय पार्टी को दिया।
अभिजीत मुखर्जी ने अपनी बहन शर्मिष्ठा मुखर्जी के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके पिता ने राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद समेत सार्वजनिक जीवन में जो कुछ भी हासिल किया, वह कांग्रेस की बदौलत था। पूर्व सांसद मुखर्जी ने यह भी कहा कि उनके पिता का निधन कोविड काल में हुआ और उस समय कई प्रतिबंधों के कारण श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक नहीं बुलाई जा सकी, हालांकि बाद में कार्यसमिति ने श्रद्धांजलि दी।
इससे पहले प्रणब मुखर्जी की बेटी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद कार्यसमिति की बैठक में सिंह के सम्मान में प्रस्ताव पारित किए जाने का हवाला दिया था और कहा था कि कांग्रेस ने उनके पिता के निधन पर ऐसा नहीं किया। उनके भाई अभिजीत मुखर्जी ने उनके बयानों को खारिज कर दिया। प्रणब मुखर्जी का 31 अगस्त 2020 को निधन हो गया था। कांग्रेस से दो बार लोकसभा सदस्य रहे मुखर्जी ने कहा, ‘उस समय कोविड काल चल रहा था, कार्यसमिति की बैठक तुरंत नहीं बुलाई गई, बाद में बुलाई गई। कार्यसमिति में कई वरिष्ठ लोग थे, और उस समय आवाजाही पर प्रतिबंध था।
अभिजीत मुखर्जी ने कहा, ‘कांग्रेस ने मेरे पिता को बनाया, इंदिरा जी ने उन्हें बनाया। बाद में उन्हें राजीव गांधी जी, पी वी नरसिम्हा राव जी और मनमोहन सिंह जी के समय में जिम्मेदारी मिली। मेरे पिता जो कुछ भी बने, वह कांग्रेस की वजह से थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उनके पिता को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। अभिजीत मुखर्जी साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए, हालांकि कुछ महीने पहले उन्होंने कांग्रेस में वापसी की इच्छा जताई थी।
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मुखर्जी ने कहा, ‘मनमोहन सिंह ऐसे अर्थशास्त्री और व्यक्ति थे जिनके बारे में जो भी कहा जाए वह कम है। मेरे पिता की भाषा में, वह एक ‘परफेक्ट जेंटलमैन’ थे। मैंने मनमोहन सिंह को कभी गुस्सा होते नहीं देखा। जब मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलता था, तो वह मुस्कुराते हुए मिलते थे। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को अपने पैरों पर खड़ा किया। उन्होंने उस बड़ी अर्थव्यवस्था की नींव रखी, जिसकी आज बात की जा रही है।’ मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।






