‘कवि, विचारक और विलक्षण प्रतिभा के धनी गुरुदेव’, रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
Rabindranath Tagore Jayanti: बंगाली कैलेंडर के 25वें दिन पोचिशे बोइशाख के खास अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी।
PM Modi Tribute To Rabindranath Tagore: गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के जयंती अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। बंगाली कैलेंडर के 25वें दिन पोचिशे बोइशाख के खास अवसर पर देशभर में महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी गई। शनिवार को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को याद करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने भारतीय समाज को एक नई सोच, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास दिया।
विलक्षण प्रतिभा के धनी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, आज, बैशाख की पच्चीस तारीख के इस विशेष दिन पर, हम गुरुदेव टैगोर के प्रति अपनी हार्दिक श्रद्धा अर्पित करते हैं। गुरुदेव टैगोर एक असाधारण साहित्यकार, विचारक और कवि थे, जो विलक्षण प्रतिभा से संपन्न थे। उन्होंने स्वयं को एक अद्वितीय दार्शनिक, शिक्षाविद, कलाकार और भारतीय सभ्यता की शाश्वत वाणी के रूप में स्थापित किया।
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Today, on the special occasion of Pochishe Boishakh, we pay our heartfelt tributes to Gurudev Tagore.Gurudev Tagore was a writer, thinker and poet of extraordinary brilliance. He made a mark as an exceptional philosopher, educationist, artist and a timeless voice of India’s…
आगे उन्होंने लिखा, अपनी रचनाओं के माध्यम से, उन्होंने मानवीय भावनाओं की गहनतम अनुभूतियों और हमारी संस्कृति के महानतम आदर्शों को अभिव्यक्त किया है। अपने नवीन विचारों, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से उन्होंने हमारे समाज को समृद्ध किया। हम उन्हें अगाध सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्मरण करते हैं। उनके विचारों का प्रकाश हमारे मन और हमारे प्रयासों का मार्गदर्शन करे।
भारतीय समाज पर अमिट प्रभाव
भारत के उप-राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुदेव को याद करते हुए पोचिशे बोइशाख के अवसर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गुरुदेव टैगोर का योगदान साहित्य के क्षेत्र से कहीं अधिक व्यापक था। गुरुदेव की रचनाओं में भारतीय सभ्यता की समृद्धि और मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों की झलक मिलती है। उन्होंने भारतीय समाज और आने वाली पीढ़ियों पर एक अमिट प्रभाव छोड़ा।
स्वतंत्रता की चेतना को दी नई ताकत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरुदेव को नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने साहित्य, संगीत और दर्शन के माध्यम से गुलामी के दौर में स्वतंत्रता की चेतना को नई ताकत दी। अमित शाह ने कहा कि टैगोर केवल महान कवि ही नहीं थे, बल्कि भारतीय आत्मा की सशक्त आवाज भी थे। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के शब्दों में संवेदनशीलता, विचारों में स्वतंत्रता का संदेश और उनकी रचनाओं में विश्व बंधुत्व की भावना साफ दिखाई देती है।
अमित शाह ने आगे कहा कि टैगोर की अमर कृति गीतांजलि ने मानवता, अध्यात्म और संवेदनशीलता को नई दिशा दी। वहीं ‘जन गण मन’ के जरिए उन्होंने देश की एकता, गरिमा और आत्मसम्मान को आवाज दी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का जीवन स्वतंत्र सोच, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक समन्वय की प्रेरणा देता है।
रवींद्रनाथ कालजयी कवि: मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें कालजयी कवि, महान दार्शनिक और रहस्यवादी चिंतक बताया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के सार्वभौमिक मानवतावाद और सद्भाव के आदर्श आज भी पूरी मानवता को प्रेरित कर रहे हैं।
बता दें कि रवींद्रनाथ टैगोर जयंती हर साल बंगाली महीने बैशाख की 25वीं तारीख को मनाई जाती है, जिसे ‘पोचिशे बोइशाख’ कहा जाता है। इस वर्ष पश्चिम बंगाल में यह उत्सव 9 मई को मनाया जा रहा है। 7 मई 1861 को कोलकाता के प्रसिद्ध जोड़ासांको ठाकुर बाड़ी में जन्मे रवींद्रनाथ टैगोर, शारदा देवी और देवेंद्रनाथ टैगोर के पुत्र थे। उन्होंने बचपन से ही लेखन शुरू कर दिया था और जल्द ही अपनी प्रतिभा से अलग पहचान बना ली। वर्ष 1913 में वे साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने।
‘बंगाल के बार्ड’ के रूप में प्रसिद्ध टैगोर ने भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के राष्ट्रगान भी लिखे। रवींद्रनाथ टैगोर जयंती पर पश्चिम बंगाल समेत देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, कविता पाठ, नृत्य नाटक और ‘रवींद्र संगीत’ की प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं। स्कूल, कॉलेज और सांस्कृतिक संस्थान उनकी साहित्यिक और कलात्मक विरासत को याद करते हुए विशेष आयोजन करते हैं। गुरुदेव की रचनाएं आज भी साहित्य, संगीत, कला और दर्शन के क्षेत्र में लोगों को गहराई से प्रेरित करती हैं।