पीएम नरेंद्र मोदी, फोटो- सोशल मीडिया
PM Modi X Post on Army Day 2026: आज 15 जनवरी को देशभर में सेना दिवस मनाया जा रहा है। इस गौरवशाली अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना के पराक्रम और बलिदान को खुले शब्दों में सलाम किया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दुर्गम पहाड़ों से लेकर बर्फीली चोटियों तक तैनात जवानों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सेना दिवस के मौके पर एक खास पोस्ट शेयर किया। पीएम ने अपने मैसेज में इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सेना का साहस केवल मैदानों तक सीमित न होकर दुर्गम पहाड़ों और बर्फ से ढकी चोटियों पर भी उनका पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करता है। प्रधानमंत्री ने सीमा पर डटे जवानों का दिल से अभिनंदन करते हुए उनके निस्वार्थ समर्पण को नमन किया। उनके अनुसार, भारतीय सेना का यह शौर्य ही है जो देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाता है और हर नागरिक के मन में भरोसा पैदा करता है।
पीएम मोदी ने भारतीय सैनिकों को निस्वार्थ सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का सबसे बड़ा प्रतीक बताया है। पीएम ने कहा कि हमारे जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहते हैं और मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। सैनिकों का अनुशासन, साहस और दृढ़ संकल्प ही वह शक्ति है जो पूरे देश में सुरक्षा की भावना को और मजबूत करती है। अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री ने उन वीर जवानों को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि पूरा देश ऐसे वीरों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगा और उन्हें सम्मान के साथ याद रखेगा।
दुर्गम स्थलों से लेकर बर्फीली चोटियों तक हमारी सेना का शौर्य और पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। सरहद की सुरक्षा में डटे जवानों का हृदय से अभिनंदन! अस्माकमिन्द्रः समृतेषु ध्वजेष्वस्माकं या इषवस्ता जयन्तु। अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु॥ pic.twitter.com/ixCwzPCWh9 — Narendra Modi (@narendramodi) January 15, 2026
देश में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाए जाने के पीछे एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कारण है। यह दिन भारतीय सैन्य इतिहास की उस बड़ी घटना का गवाह है जब भारतीय सेना को अपना पहला भारतीय नेतृत्व मिला था। साल 1949 में इसी दिन फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में पद संभाला था। उन्होंने यह जिम्मेदारी ब्रिटिश जनरल एफ. आर. आर. बुचर से ग्रहण की थी जो भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ थे। इसी ऐतिहासिक परिवर्तन और भारतीय सेना की वीरता, अनुशासन और बलिदान के सम्मान में हर साल यह दिन गौरव के साथ मनाया जाता है।
यह भी पढ़ें: बीएसएफ और आईटीबीपी को मिले नए मुखिया: प्रवीण कुमार संभालेंगे BSF की कमान, शत्रुजीत कपूर बने ITBP के महानिदेशक
सेना दिवस के अवसर पर आज देश के विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों और छावनियों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की अजेय ताकत, अटूट अनुशासन और समृद्ध सैन्य परंपराओं का प्रदर्शन करना है। इसके साथ ही, कार्यक्रमों के माध्यम से शहीद जवानों को याद किया जाता है और युवाओं को प्रेरित करने के लिए वीरता से जुड़ी कहानियों और प्रदर्शनों को साझा किया जाता है। इन गतिविधियों के जरिए भावी पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करने का प्रयास किया जाता है, ताकि देश की सीमाओं की रक्षा का संकल्प सदैव जीवित रहे।