एक निर्दलीय सांसद ने उड़ाया 780 सांसदों का होश, संसद सत्र को लेकर की ऐसी मांग कि बढ़ गई टेंशन
Daman and Diu MP Umesh Patel: उमेश पटेल ने गुरुवार को एक बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उमेश पटेल ने मांग की है कि सदन की कार्यवाही न चलने देने पर खर्च होने वाले पैसे की वसूली सांसदों के वेतन से हो।
- Written By: अभिषेक सिंह
निर्दलीय सांसद उमेश पटेल (सोर्स- सोशल मीडिया)
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र हंगामेदार रहा। लोकसभा में चर्चा के लिए 120 घंटे निर्धारित थे, लेकिन केवल 37 घंटे ही चर्चा हुई। इसमें से अधिकांश चर्चा ऑपरेशन सिंदूर पर हुई।
मानसून सत्र के आखिरी दिन एक निर्दलीय सदस्य ने सदन में गतिरोध के लिए सांसदों के वेतन में कटौती की मांग को लेकर संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। जो कि सियासी चर्चा का विषय बन गया है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव से निर्दलीय सांसद उमेश पटेल ने गुरुवार को एक बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उमेश पटेल ने मांग की है कि सदन की कार्यवाही न चलने देने पर खर्च होने वाले पैसे की वसूली सांसदों के वेतन से की जाए। उमेश पटेल जो बैनर लेकर आए थे, उस पर ‘माफी मांगो, सत्ता पक्ष और विपक्ष माफी मांगो’ लिखा था।
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सांसद ने की इतनी बड़ी मांग
इस बारे में उन्होंने कहा कि सरकार से मेरी मांग है कि अगर सदन नहीं चलता है, तो सांसदों को वेतन और अन्य लाभ न दें। उमेश पटेल ने कहा कि इस सत्र के लिए सदन पर हुए खर्च की वसूली भी सांसदों की जेब से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सदन ही नहीं चला, तो उस पर होने वाले खर्च का भुगतान जनता क्यों करे।
जानिए कौन हैं उमेश पटेल?
उमेश पटेल दमन और दीव से निर्दलीय सांसद हैं। विरोध प्रदर्शन के लिए उन्होंने जो बैनर लिया था, उसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से देश की जनता से माफी मांगने की अपील की गई थी। उमेश पटेल ने यह बैनर लेकर संसद भवन परिसर में पूरे सत्र के दौरान सदन में जारी गतिरोध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
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गौरतलब है कि लोकसभा में चर्चा के लिए 120 घंटे निर्धारित थे, लेकिन केवल 37 घंटे ही चर्चा हो सकी। सदन में चर्चा के लिए निर्धारित कुल समय का दो-तिहाई से ज़्यादा समय हंगामे की भेंट चढ़ गया। इस दौरान लोकसभा में 14 विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 12 पारित हुए। गतिरोध के कारण ज़्यादातर विधेयक बिना चर्चा के ही पारित हो गए। एक विधेयक प्रवर समिति और एक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया।
