मल्लिकार्जुन खड़गे और जेपी नड्डा, फोटो- सोशल मीडिया
Firing on Farooq Abdullah: भारतीय संसद का माहौल अक्सर गर्म रहता है, लेकिन बुधवार को राज्यसभा में जो दृश्य देखने को मिला, उसने देश की सुरक्षा और राजनीति के अंतर्संबंधों पर एक नई बहस छेड़ दी है। जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के दिग्गज नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले की आंच अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच चुकी है।
संसद के बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ऐसी तीखी नोकझोंक हुई, जिसने सदन की गरिमा और सुरक्षा के प्रोटोकॉल, दोनों को केंद्र में ला खड़ा किया। एक आम नागरिक के लिए यह खबर सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि अगर जेड-प्लस सुरक्षा वाले पूर्व मुख्यमंत्री सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का जिम्मा किसके कंधों पर है?
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए सीधे तौर पर केंद्र सरकार की घेराबंदी की। उन्होंने अत्यंत गंभीर लहजे में आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा आज बड़े खतरे में है। खड़गे ने इस हमले के पीछे जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा न दिए जाने को एक प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि वहां की पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था की सीधी जिम्मेदारी अब केंद्रीय गृह मंत्री के पास है, इसलिए वहां कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। खड़गे ने सदन में यहां तक कह दिया कि क्या सरकार का इरादा फारूक अब्दुल्ला को खत्म करने का है, क्योंकि जो नेता धर्मनिरपेक्षता और देश को जोड़ने की बात करते हैं, उन्हें साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
विपक्ष के इन भारी-भरकम आरोपों का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मोर्चा संभाला। उन्होंने खड़गे के आरोपों को ‘निंदनीय’ और कांग्रेस की संकीर्ण सोच का नतीजा करार दिया। नड्डा ने स्पष्ट रूप से कहा कि हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखना और उसे राज्य के दर्जे से जोड़ना कतई उचित नहीं है।
उन्होंने सरकार की ओर से सदन को विश्वास दिलाया कि बुधवार रात हुई यह घटना वाकई बहुत चिंताजनक और गंभीर मामला है। भारत सरकार इस जानलेवा हमले की गहराई से जांच करवा रही है और गिरफ्तार आरोपी के असली मंसूबों का पता लगाया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि डॉ. अब्दुल्ला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी।
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संसद में हुई इस बहस ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य को चर्चा में ला दिया है। विपक्ष का मानना है कि जब तक कश्मीर के लोगों के हाथ में उनकी अपनी सत्ता और पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं आता, तब तक वहां के लोग और नेता सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। खड़गे ने दावा किया कि केंद्र सरकार के हाथों में कश्मीर सुरक्षित नहीं है। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष केवल डर का माहौल बना रहा है और सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।