
पीएम मोदी ने छात्रों से किया संवाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pariksha Pe Charcha 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड में कोयंबटूर के छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के छात्रों की ऊर्जा और जिज्ञासा ने उन्हें गहरी छाप छोड़ी है। पीएम मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा, “इस बार ‘परीक्षा पे चर्चा’ कुछ अलग और खास है। कई छात्रों ने मुझसे यह सुझाव दिया था कि इस कार्यक्रम को देश के विभिन्न हिस्सों में भी आयोजित किया जाना चाहिए। इसी विचार के तहत इस बार मैंने देश के विभिन्न हिस्सों के छात्रों के साथ बैठकर चर्चा की।” इस क्रम में, प्रधानमंत्री ने सबसे पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर के छात्रों से बातचीत की।
कोयंबटूर के छात्रों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया, “मैं पिछले कई सालों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ के माध्यम से कक्षा 10 से 12 तक के छात्रों से मिल रहा हूं और उनसे कुछ नया सीखने की कोशिश करता हूं। जब भी मैं लोगों से मिलता हूं, वे स्टार्टअप्स के बारे में बात करते हैं।”
उन्होंने छात्रों को यह सलाह दी कि सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आप क्या करना चाहते हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ स्टार्टअप टेक्नोलॉजी पर आधारित होते हैं। यदि आपके दोस्त किसी खास क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, तो आप उनके साथ मिलकर एक छोटा सा स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को जीवन में अनुशासन और मोटिवेशन के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा, “अनुशासन और मोटिवेशन दोनों जीवन में अहम हैं। यदि अनुशासन नहीं होगा, तो कितना भी इंस्पिरेशन हो, वह कोई काम नहीं आएगा। अनुशासन जीवन में बेहद जरूरी है, और यह इंस्पिरेशन के लिए ‘सोने पर सुहागा’ का काम करता है। बिना अनुशासन के, इंस्पिरेशन सिर्फ बोझ बन जाता है और निराशा पैदा करता है।”
जब एक छात्रा ने पढ़ाई और अपने पैशन को लेकर सवाल पूछा, तो प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब देते हुए कहा, “पढ़ाई और अपने पैशन को अलग-अलग मत समझिए। उदाहरण के लिए, अगर आपको कला में रुचि है और आप विज्ञान का कोई विषय पढ़ रहे हैं, तो आप उस विषय से जुड़ी कोई कला या चित्र बना सकते हैं। इस तरह आप दोनों में अपनी प्रैक्टिस कर सकते हैं।”
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एक अन्य छात्रा ने ‘विकसित भारत’ में योगदान देने के बारे में सवाल पूछा, तो पीएम मोदी ने उसकी प्रशंसा की और कहा, “मुझे खुशी है कि स्कूली छात्र अब ‘विकसित भारत’ के बारे में सोच रहे हैं। 2047 तक हमें भारत को एक विकसित देश बनाना है, लेकिन इसके लिए हमें सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि विकसित देशों की आदतें भी अपनानी होंगी।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सफाई बनाए रखना और नियमों का पालन करना, यही वह आदतें हैं जो विकसित देशों में होती हैं। अगर मैं खुद ऐसा करता हूं, तो इसका मतलब है कि मैं अपने देश के विकास में योगदान दे रहा हूं।
एजेंसी इनपुट के साथ-






