
12 फरवरी को बांग्लादेश में होगा मतदान (सोर्स-सोशल मीडिया)
Bangladesh Election Voting 12 Feb: बांग्लादेश में 18 महीनों की लंबी राजनीतिक अस्थिरता के बाद अब आम चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चुनाव आयोग के अनुसार 12 फरवरी को देश की 299 संसदीय सीटों पर बैलेट पेपर के जरिए मतदान प्रक्रिया शुरू होगी। मतदान के साथ ही जनता उस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन पर भी अपना फैसला सुनाएगी जिसकी मांग जुलाई आंदोलन के बाद उठी थी। देश में कुल 12 करोड़ 76 लाख मतदाता हैं जिनमें से 6 करोड़ 28 लाख महिलाएं इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों पर वोटिंग 12 फरवरी की सुबह साढे सात बजे से बैलेट पेपर के माध्यम से शुरू होगी। शेरपुर में एक उम्मीदवार के निधन के कारण अब 300 की जगह कुल 299 सीटों पर ही जनता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेगी। वोटिंग खत्म होने के बाद उसी दिन शाम को साढे चार बजे से मतगणना शुरू होगी और अंतिम परिणाम 24 घंटे में आ सकते हैं।
शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के कारण इस बार चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच है। खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने वापसी कर BNP की कमान संभाली है जिससे उनकी पार्टी के समर्थकों में नई उम्मीद जगी है। वहीं जुलाई आंदोलन के छात्र नेता नाहिद इस्लाम की नेशनल सिटिजंस पार्टी ने जमात के साथ गठबंधन कर 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
देश लंबे समय से राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था की खराब स्थिति जैसी गंभीर समस्याओं से लगातार जूझता रहा है। अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाएं इस चुनाव में सुरक्षा की दृष्टि से बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। हिंदू समुदाय का मानना है कि जब तक उन्हें सुरक्षा की पूर्ण गारंटी नहीं मिलती तब तक वे मतदान में हिस्सा लेने से हिचकिचाएंगे।
चुनाव में कुल 1981 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं जिनमें केवल 78 महिलाएं शामिल हैं जो महिला नेतृत्व की कम संख्या को दर्शाता है। चुनाव प्रचार की समय सीमा 10 फरवरी की सुबह साढे सात बजे समाप्त हो जाएगी जिसके बाद उम्मीदवार कोई सार्वजनिक सभा नहीं कर सकेंगे। पूरे देश में 12 करोड़ से अधिक मतदाता इस बार एक स्थिर सरकार और बेहतर शासन की उम्मीद के साथ अपना कीमती वोट डालेंगे।
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दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने भारत के साथ अपने भविष्य के संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है। हालांकि अतीत में इन दलों के साथ भारत के रिश्ते हमेशा बहुत सहज नहीं रहे हैं लेकिन अब दोनों ही दल सहयोग चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठन भी चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में ढाका पहुंच चुके हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और शांति की निगरानी की जा सके।






