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पराक्रम दिवस-2025: आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 128वीं जयंती, जानें ‘आजादी’ के लिए ‘खून की मांग’ रखने वाले इस ‘सूरमा’ के बारे में
गणतंत्र दिवस से पहले हमारा देश पराक्रम दिवस भी मनाता है। यह पराक्रम दिवस देश के एक वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साहस को समर्पित दिन है। यह खास दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जो जुड़ा हुआ है।
- Written By: राहुल गोस्वामी

आज पराक्रम दिवस
नई दिल्ली : दोस्तों, हमारे देश में जनवरी माह इतिहास की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। जहां जनवरी की माह में भारत ने अपने संविधान को अपनाया और इस तरह से लोकतांत्रिक राष्ट्र का निर्माण हुआ तो वहीं स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दो दिग्गज जननायकों का भी इस माह से ही गहरा संबंध है।
एक खास बात यह है कि, गणतंत्र दिवस से पहले हमारा देश पराक्रम दिवस भी मनाता है। दोस्तों, यह पराक्रम दिवस देश के एक वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साहस को समर्पित दिन है। यह खास दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जो जुड़ा हुआ है। आज यानी 23 जनवरी को पूरा देश, महान स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी नेता और सच्चे देशभक्त सुभाष चंद्र बोस की 128वीं जयंती मनाएगा।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान का कोई भी सानी नहीं है।देश की स्वतंत्रता, समानता, राष्ट्रभक्ति के लिए उनके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता। वे एक, ओजस्वी, साहसी और स्वतंत्रता के प्रति अति उत्साहित नेता माने जाते थे।
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जानकारी दें कि, नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। वह बचपन से हीपढ़ाई के काफी तेज थे। वहीं स्कूल के दिनों से उनका राष्ट्रवादी स्वभाव सब से सभी वाकिफ थे। अपनी स्कूलिंग के बाद उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन उग्र राष्ट्रवादी गतिविधियों के कारण उन्हें कॉलेज निकाल दिया गया।
इसके बाद वे अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए।लेकिन नेताजी परआजादी की जंग में शामिल होने के लिए ऐसे प्रेरित हुए, कि उन्होने भारतीय सिविल सेवा की आरामदेह नौकरी भी ठुकरा दी। अपको जानकार अचरज होगा कि, उन दिनों भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में उनकी रैंक 4 थी। जो किसी भी भारतीय के लिए सिविल सेवक का पद बेहद प्रतिष्ठित माना जाता था। लेकिन नेताजी ने तो अपना शेष जीवन भारत को ब्रिटिश औपनिवेशक शासन से मुक्त कराने में समर्पित करने का फैसला कर लिया था।
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आजादी के इस मतवाले ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में काम किया, लेकिन उनके क्रांतिकारी विचारों के कारण उन्होंने खुद की अलग राह बना ली। जी हां, अंग्रेजों से भारत को आजाद कराने के लिए नेताजी ने साल 1943 में ‘आजाद हिंद सरकार’ की स्थापना करते हुए ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन किया। जिसे जर्मनी, इटली, जापान, आयरलैंड, चीन, कोरिया, फिलीपींस समेत 9 देशों की मान्यता भी मिल चुकी थी।
आपकों बता दें कि, सुभाष चंद्र ने “आजाद हिंद फौज”की स्थापना करते हुए “जय हिंद” व “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” जैसे प्रेरणादायक नारे भी दिए। उनकी योजनाओं और वीरता ने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई ही दिशा दी। इसके सात ही उन्होंने अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक नामक राजनीतिक इकाई की स्थापना भी की थी।
उनके देशप्रेम को याद करते हुए साल 2021 में भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य नेताजी के जीवन और उनकी शिक्षाओं को भारत के जन-जन तक पहुंचाना है। ताकि यह दिन हर भारतीय को अपने कर्तव्यों और देश के प्रति समर्पण की याद दिलाता रहे। यह दिन हमें हमेंशा प्रेरित करता रहेगा कि हम अपने देश की सेवा के लिए हर संभव प्रयास करते रहें।
Parakram diwas 2025 the legacy of netaji subhash chandra bose
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