केरल चुनाव से पहले सीपीएम नेता को पद्म सम्मान, BJP के कट्टर आलचकों को अवार्ड देने के पीछे क्या है रणनीति?

Padma Vibhushan Award: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म सम्मान में अच्युतानंदन और शिबू सोरेन को शामिल किए जाने को लेकर नए राजनीतिक संकेत देखे जा रहे हैं.
padma awards 2025 achuthanandan and shibu soren bjp political strategy
अच्युतानंदन और शिबू सोरेन
Published on
Updated on

BJP Strategy for Kerala Elections : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म सम्मानों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि मोदी सरकार वैचारिक मतभेदों के बावजूद अपने राजनीतिक विरोधियों को सम्मान देने से परहेज नहीं करती। रविवार शाम जारी पद्म सम्मान सूची में दो नाम खास तौर पर चर्चा में रहे, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ सीपीएम नेता वी.एस. अच्युतानंदन तथा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन। दोनों दिवंगत नेताओं को पद्म सम्मान से नवाज़ा गया है, हालांकि इसके पीछे के राजनीतिक संदेश और संभावित रणनीति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

बीजेपी-RSS के आलोचकों को भी सम्मान

ध्यान देने वाली बात यह है कि वी.एस. अच्युतानंदन बीजेपी और आरएसएस के कट्टर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में इन संगठनों को सांप्रदायिक बताते हुए लगातार निशाना बनाया। वे बीजेपी पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे और “सेक्युलर ताकतों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने” की अपील करते थे। अच्युतानंदन कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी कई बार तीखे हमले करते रहे और राहुल गांधी को “अपरिपक्व” तक कह चुके थे। ऐसे में उन्हें पद्म विभूषण दिए जाने के फैसले को राजनीतिक नजरिए से केरल विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। केरल में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में जुटी बीजेपी को उम्मीद है कि यह कदम लेफ्ट समर्थकों के बीच सकारात्मक संदेश देगा, जैसा कि पार्टी पश्चिम बंगाल में भी करने की कोशिश कर चुकी है।

शिबू सोरेन को पद्म भूषण: झारखंड में नए राजनीतिक संकेत?

झारखंड में भी पद्म सम्मान के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। आदिवासी राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में शामिल शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिए जाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब राज्य में बीजेपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच संभावित नज़दीकियों की अटकलें तेज़ हैं।

बिहार चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद यह चर्चा शुरू हुई थी कि हेमंत सोरेन की पार्टी कांग्रेस से दूरी बनाकर बीजेपी के करीब आ सकती है। इसी कड़ी में हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन की एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की खबरें भी सामने आई थीं। तब कहा गया था कि शिबू सोरेन को भारत रत्न या पद्म सम्मान देकर केंद्र सरकार जेएमएम को राजनीतिक संकेत दे सकती है।

अब सम्मान की घोषणा के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। माना जा रहा है कि बीजेपी आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए शिबू सोरेन के प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहती है, क्योंकि तमाम प्रयासों के बावजूद यह वर्ग अब तक पार्टी के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है।

विरोधियों को सम्मान देने की मोदी सरकार की पुरानी मिसालें

मोदी सरकार द्वारा वैचारिक या राजनीतिक विरोधियों को सम्मानित करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मौकों पर सरकार ने बड़े राजनीतिक नेताओं को पद्म पुरस्कार या भारत रत्न से नवाज़ा है, खासकर अहम चुनावी दौर में।

  • 2023 में मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण (मरणोपरांत)
  • 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न
  • 2024 में आंध्र प्रदेश चुनाव से पहले पी.वी. नरसिंह राव को भारत रत्न (मरणोपरांत)
  • 2021 में असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को पद्म भूषण
  • 2017 में शरद पवार को पद्म विभूषण
  • 2022 में गुलाम नबी आज़ाद को पद्म भूषण

इसके अलावा कांग्रेस के एस.सी. जमीर, तोखेहो सेमा, पीडीपी नेता मुजफ्फर बेग और अकाली दल के तरलोचन सिंह को भी मोदी सरकार पद्म सम्मान दे चुकी है। 2024 में सरकार ने पी.वी. नरसिंह राव के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया। उसी वर्ष बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन को भी भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वहीं, 2022 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को पद्म भूषण देने की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com