ट्रेड डील या अमेरिका के आगे समर्पण? पी चिदंबरम का बड़ा दावा- ‘यह समझौता भारत की जीत नहीं, बड़ी हार है’
India US Trade Deal: पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को 'अंतरिम समझौता' बताते हुए केंद्र सरकार पर डेटा छिपाने और देश के निर्यातकों के हितों से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
पी चिदंबरम, फोटो- सोशल मीडिया
P Chidambaram on India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस सौदे की वैधानिकता और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चिदंबरम का दावा है कि सरकार जिसे ‘ऐतिहासिक व्यापारिक जीत’ बता रही है, वह वास्तव में अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ एक असमान समझौता है।
पी. चिदंबरम ने भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे केवल एक “अंतरिम समझौता” करार दिया है। उन्होंने एनडीटीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में तर्क दिया कि इसे “द्विपक्षीय व्यापार समझौते” के रूप में सेलिब्रेट किया जाना गलत है।
ट्रेड डील पर क्या बोले चिदंबरम?
चिदंबरम के अनुसार, संयुक्त बयान को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट होता है कि यह समझौता पूरी तरह से अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और भारत के हाथ इसमें कुछ खास नहीं लगा है। उन्होंने इसे एक ऐसे ढांचे के रूप में देखा जो भविष्य में किसी संभावित अंतिम समझौते का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, लेकिन वर्तमान में यह अपूर्ण है।
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‘सेक्शन 232’ की गोपनीयता पर उठाए सवाल
चिदंबरम ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित कोई भी आधिकारिक डील डॉक्यूमेंट पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं है? उन्होंने कहा कि जनता को केवल व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक संयुक्त बयान थमा दिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने ‘सेक्शन 232’ की जांच से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक न करने पर भी सरकार को घेरा।
चिदंबरम ने सवाल किया, “आखिर सरकार राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पारित आदेशों और जांच की डिटेल्स को सामने लाने से क्यों बचना चाहती है?” उन्होंने यहां तक अंदेशा जताया कि शायद खुद भारत सरकार को ही इन आदेशों की पूरी जानकारी नहीं है, और यदि ऐसा है, तो संयुक्त वक्तव्य जारी करने की इतनी जल्दी क्या थी?
टैरिफ में भारी वृद्धि: पी. चिदंबरम
पूर्व वित्त मंत्री ने समझौते की आर्थिक बारीकियों पर चर्चा करते हुए बताया कि यह सौदा भारतीय निर्यातकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े देते हुए कहा कि अप्रैल 2025 से पहले टैरिफ औसतन 2 से 3 प्रतिशत के बीच थे। लेकिन इस नए समझौते के बाद, अमेरिका ने टैरिफ को 18 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है। चिदंबरम ने चेतावनी दी कि टैरिफ में यह भारी उछाल भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों जैसे समुद्री भोजन, चमड़े के उत्पाद और वस्त्रों पर विनाशकारी प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा कि इस “असमरूपता” के कारण भारत को फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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‘कूटनीतिक जीत’ के दावों का उपहास: जयशंकर पर कसा तंज
चिदंबरम ने इस सौदे को भारत की “डिप्लोमैटिक जीत” कहे जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब खुद विदेश मंत्री को ही इस व्यापार समझौते की बारीकियों के बारे में जानकारी नहीं है, तो इसे कूटनीतिक सफलता कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने मांग की कि सरकार को बंद दरवाजों के पीछे हुई इस बातचीत का सच देश के सामने रखना चाहिए। चिदंबरम के इन आरोपों ने बजट सत्र के बीच सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जहां विपक्ष अब इस समझौते पर विस्तृत चर्चा और पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
