जब दुकानदार ने गडकरी को EMI पर TV देने से किया इनकार…फिर क्या हुआ? केंद्रीय मंत्री ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
Nitin Gadkari TV Story: नितिन गडकरी ने बताया कि 1995 में लोन पर टीवी न मिलने के अनुभव से उन्हें BOT मॉडल का आइडिया आया, जिसने सीमित बजट के बावजूद भारत में एक्सप्रेसवे और फ्लाईओवर्स की राह आसान की।
- Written By: अर्पित शुक्ला
नितिन गडकरी
Nitin Gadkari on BOT Model: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि कैसे एक छोटी-सी घटना ने भारत में सड़क निर्माण की सोच बदल दी। उन्होंने कहा कि टीवी खरीदने के दौरान मिले एक “रिजेक्शन” ने उन्हें बीओटी (Build-Operate-Transfer) मॉडल का विचार दिया, जो आज देश में सड़क और पुल निर्माण का एक सफल मॉडल बन चुका है।
दिल्ली में नवभारत द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026’ में गडकरी ने बताया कि यह घटना साल 1995 की है, जब वह महाराष्ट्र सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री थे। उस समय उन्हें अपने घर के लिए एक नया टीवी खरीदना था। वह एक बीपीएल शोरूम पहुंचे और टीवी पसंद किया। जब उन्होंने दुकानदार से किस्तों पर टीवी देने की बात कही, तो दुकानदार ने उनका नाम और पेशा पूछा।
जब किस्त पर नहीं मिला टीवी
मंत्री होने की जानकारी मिलने के बाद दुकानदार ने बहाना बनाया कि यह टीवी उपलब्ध नहीं है और बाद में नया पीस भेज देगा। लेकिन वह टीवी कभी नहीं भेजा गया। बाद में गडकरी को पता चला कि उस समय बैंक और कई दुकानदार नेताओं और वकीलों को किस्तों पर सामान देने से बचते थे, क्योंकि उन्हें जोखिम वाला ग्राहक माना जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि एक बैंक ने उनका क्रेडिट कार्ड आवेदन भी अस्वीकार कर दिया था।
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सुरंग जैसी बड़ी परियोजनाएं किस्तों में क्यों नहीं बनवा सकती?
गडकरी ने कहा कि इस घटना ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने खुद से सवाल किया कि जब एक आम व्यक्ति किस्तों पर टीवी खरीद सकता है, तो सरकार सड़क, पुल और इसी सोच से बीओटी (Build-Operate-Transfer) मॉडल का विचार सामने आया। इस मॉडल में निजी कंपनियां सड़क या पुल बनाती हैं, कुछ वर्षों तक टोल के जरिए अपनी लागत निकालती हैं और तय समय के बाद परियोजना सरकार को सौंप देती हैं।
नितिन गडकरी
सीमित बजट में मिला बड़ा समाधान
गडकरी ने बताया कि उस समय सरकार के पास सड़क निर्माण के लिए बहुत सीमित बजट था। इतने कम पैसों में मुंबई जैसे शहर में फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे बनाना आसान नहीं था। ऐसे में बीओटी मॉडल सबसे बेहतर विकल्प बनकर सामने आया।
उन्होंने सबसे पहले ठाणे-भिवंडी बाईपास परियोजना में इस मॉडल को लागू किया। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई शर्तों को आसान बनाया गया। साथ ही स्कूटर और ऑटो-रिक्शा जैसे छोटे वाहनों को टोल से छूट दी गई, ताकि लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे बना बड़ी सफलता
गडकरी ने बताया कि बाद में एमएसआरडीसी (MSRDC) के माध्यम से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का निर्माण भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ा। उनका दावा है कि सही योजना और नई नीति की वजह से सरकार को इस परियोजना में हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई।
नितिन गडकरी
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आज पूरे देश में अपनाया जा रहा मॉडल
आज बीओटी मॉडल भारत में सड़क, पुल और अन्य बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था बन चुका है। गडकरी का कहना है कि कभी एक टीवी खरीदने के दौरान मिला एक साधारण-सा अनुभव आगे चलकर देश के सड़क निर्माण की दिशा बदलने की वजह बन गया।
