नीट के रिवाइज्ड रिजल्ट की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट का याचिका पर विचार से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2025 की उत्तर कुंजी और परिणाम पर उठी आपत्ति वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में सवाल के उत्तर को गलत बताया गया था, जिससे कोर्ट ने इनकार कर दिया।
- Written By: सौरभ शर्मा
नीट यूजी 2025 रिवाइज्ड रिजल्ट जारी नहीं होगा
नई दिल्ली: NEET UG 2025 के परिणाम को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। परीक्षा में शामिल छात्र द्वारा दायर याचिका में तीन सवालों के उत्तर को गलत बताते हुए संशोधित परिणाम और काउंसलिंग पर रोक की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह राष्ट्रीय परीक्षा में व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब NEET UG 2025 के संशोधित परिणाम की कोई संभावना नहीं बची है।
याचिकाकर्ता छात्र शिवम गांधी रैना ने आरोप लगाया था कि एनटीए द्वारा प्रश्न संख्या 136 (कोड 47) के उत्तर में गंभीर त्रुटि की गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सही उत्तर दिया था, लेकिन फाइनल आंसर-की में गलत उत्तर दर्ज किया गया। इसके चलते उन्हें अंक नहीं मिले, जिससे उनकी रैंक और भविष्य दोनों प्रभावित हुए। याचिका में NEET UG परिणाम रद्द कर संशोधित परिणाम जारी करने और काउंसलिंग पर रोक की मांग की गई थी।
कोर्ट बोला व्यक्तिगत मामलों में नहीं कर सकते हस्तक्षेप
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आर महादेवन की बेंच ने स्पष्ट किया कि कोर्ट एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में व्यक्तिगत आपत्तियों के आधार पर दखल नहीं दे सकता। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता सैद्धांतिक रूप से सही हो सकते हैं, लेकिन हर उत्तर का अलग-अलग मूल्यांकन संभव नहीं है। कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
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वकील की दलील पर भी नहीं झुका सुप्रीम कोर्ट
याचिकाकर्ता के वकील बाला ने कहा कि यह व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कई छात्रों के करियर का मामला है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को याद दिलाया कि 2024 में भी कोर्ट ने IIT दिल्ली की विशेषज्ञ समिति से रिपोर्ट लेकर आंसर-की में सुधार कराया था। लेकिन बेंच ने दो टूक कहा कि वे अपनी राय बदलने को तैयार नहीं हैं और समिति गठन की मांग को भी खारिज कर दिया।
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बता दें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि एनटीए द्वारा एक प्रश्न (प्रश्न संख्या 136, कोड संख्या 47) के लिए दिए गए उत्तरों में गलती थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि शीर्ष अदालत ने 2024 की इस परीक्षा में हस्तक्षेप किया और आईआईटी दिल्ली द्वारा दी गई विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर गलतियों को सुधारने का आदेश दिया।
