प्रोसेस्ड फूड और स्ट्रेस बिगाड़ रहे आपकी सेहत, नवभारत के मंच से अनुप्रिया पटेल ने दिया स्वस्थ रहने का मंत्र
Navbharat Conclave: नवभारत कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से लड़ने पर जोर दिया।
- Written By: अमन उपाध्याय
अनुप्रिया पटेल. फोटो- नवभारत
Navbharat Conclave Anupriya Patel On Health: दिल्ली में आयोजित ‘नवभारत कॉन्क्लेव’ में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत के भविष्य को लेकर अपने विचार के रखा। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज हमारा लक्ष्य बड़ा है और भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बढ़ती ख्याति के साथ दुनिया के किसी भी देश से पीछे नहीं रहना चाहता। पटेल ने विश्वास जताया कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना निश्चित रूप से पूरा होगा, क्योंकि भारत आज किसी भी विकसित राष्ट्र के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
स्वस्थ नागरिक: विकसित भारत की धुरी
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जब हम एक विकसित राष्ट्र की परिकल्पना करते हैं, तो स्वास्थ्य और आयुष मंत्रालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उनके अनुसार, किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
जब देश के नागरिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे, तभी वे अपने पूरे सामर्थ्य और क्षमता के साथ देश के विकास में अपना योगदान दे पाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘स्वस्थ भारत’ का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि ‘होल ऑफ सोसाइटी’ और ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ के नजरिए से ही प्राप्त किया जा सकता है।
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जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां
वर्तमान में पूरी दुनिया गैर-संचारी रोगों जैसे मोटापा (ओबेसिटी), हृदय रोग, किडनी की समस्याएं, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और विभिन्न प्रकार के कैंसर के बढ़ते बोझ का सामना कर रही है। पटेल ने बताया कि ये सभी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हैं, जो आधुनिक जीवन के ‘सेडेंटरी लाइफस्टाइल’ और बिगड़ी हुई खानपान की आदतों का परिणाम हैं।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि लोग आजकल ताजे, स्वास्थ्यवर्धक और मौसमी भोजन के बजाय प्रोसेस्ड और फ्रोजन फूड को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे असंतुलन पैदा हो रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता असर
बीमारियों के बढ़ते ग्राफ के पीछे ‘तनाव’ एक मुख्य कारक बनकर उभरा है। पटेल ने उल्लेख किया कि आज समाज का हर वर्ग, चाहे वह एक छोटा कर्मचारी हो या कोई शीर्ष अधिकारी, उच्च तनाव वाले वातावरण में काम कर रहा है। इस निरंतर तनाव का सीधा और नकारात्मक असर नागरिकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर हो रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ गया है। सरकार इन परिस्थितियों से निपटने के लिए एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपना रही है।
नवभारत कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, फोटो- नवभारत
मेगा स्क्रीनिंग प्रोग्राम
सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए देशभर में 1,84,000 ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ का एक विशाल नेटवर्क स्थापित किया है। इस नेटवर्क के माध्यम से 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक की डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर की प्रारंभिक जांच की जा रही है।
यह दुनिया का सबसे बड़ा ‘पॉपुलेशन बेस्ड स्क्रीनिंग प्रोग्राम’ है, जिसके तहत करोड़ों लोगों की मुफ्त जांच हो रही है ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके। इसके साथ ही, ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान के तहत लोगों को पौष्टिक, संतुलित, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
योग और फिट इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं लाल किले की प्राचीर से मोटापे के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया है और ‘नमक, चीनी, तेल – आज से थोड़ा कम’ जैसे अभियानों के जरिए जनता को जागरूक किया जा रहा है। पटेल ने योग को ‘जीरो बजट हेल्थ एश्योरेंस’ बताया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है और आज दुनिया के तमाम देश इसे अपना रहे हैं।
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आयुष मंत्रालय योग के माध्यम से जीवनशैली की बीमारियों से लड़ने में मदद कर रहा है, जबकि खेल मंत्रालय का ‘फिट इंडिया’ अभियान और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री की ‘संडे ऑन साइकिल’ जैसी पहल नागरिकों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
