नई दिल्लीः भारत में ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार के लिए 17 जनवरी 2025 को ICT (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) और कचरा प्रबंधन पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने कचरा प्रबंधन की चुनौतियों और ICT-आधारित समाधानों के महत्व पर चर्चा की।
भारत में हर साल 62 मिलियन टन से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसका अधिकांश हिस्सा सही तरीके से एकत्रित या निपटाया नहीं जाता। ICT का उपयोग रियल-टाइम ट्रैकिंग और संसाधन आवंटन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उभरकर सामने आया है। महाराष्ट्र ने QR कोड आधारित ICT समाधान को सफलतापूर्वक लागू किया, जिससे कचरा प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी। सम्मेलन में इस प्रणाली के स्केलेबिलिटी और प्रभावकारिता पर चर्चा की गई।
आधुनिक प्रौद्योगिकियां एवं उनका प्रभाव
सम्बंधित ख़बरें
कौन हैं गुलफिशा फातिमा? 4 साल बाद जेल से हुईं रिहा, जानें दिल्ली दंगे से कैसे जुड़ा नाम- VIDEO
शाहजहां ने बसाया…संजय ने उजाड़ा, तुर्कमान गेट का ‘खूनी’ इतिहास; जब मलबे के साथ फेंक दी गई थी लाशें
‘फैज-ए-इलाही’ के बाद ‘जामा मस्जिद’ का नंबर! HC के आदेश के बाद खलबली, अतिक्रमण के सर्वे के निर्देश
‘कितनी मस्जिदें गिराओगे?’ फैज-ए-इलाही के पास अतिक्रमण अभियान पर भड़के इमरान, सरकार की कमजोरी पर सवाल
सम्मेलन में AI, मशीन लर्निंग (ML), और GIS जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों के ICT समाधान में एकीकरण पर गहन विचार-विमर्श हुआ। ये तकनीकें कचरा प्रबंधन में निगरानी और प्रदर्शन सुधार को सुनिश्चित करती हैं। विशेषज्ञों ने NGT (राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल) के दिशानिर्देशों में ICT-आधारित समाधानों को अनिवार्य करने की सिफारिश की।
नीति सुधार और कार्यान्वयन
भारत में कचरा प्रबंधन के लिए नीतियां पहले से ही मौजूद हैं, जैसे कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016, लेकिन इन नीतियों का सही तरीके से कार्यान्वयन अब भी चुनौतीपूर्ण है। विशेषज्ञों ने नीति सुधार की आवश्यकता पर बल दिया और सरकार से कचरा प्रबंधन में ICT के उपयोग को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही, उन्होंने कचरा प्रबंधन के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी और बहु-हितधारक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की सिफारिश की।
ICT समाधान के लाभ
ICT-आधारित समाधान से प्रशासन को कई फायदे होते हैं, जैसे लागत की बचत, पारदर्शिता, और कर्मचारियों की जवाबदेही। QR कोड आधारित सिस्टम से प्रत्येक संपत्ति को अद्वितीय पहचान मिलती है, जिससे कचरा संग्रहण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। इसके अलावा, यह समाधान स्रोत पृथक्करण और कचरे की लैंडफिल में कमी को भी बढ़ावा देता है।
प्रशासन के लिए लाभ
- लागत प्रभावी: श्रम की बचत के माध्यम से: केंद्रीय डैशबोर्ड द्वारा निगरानी करने से भौतिक निगरानी की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण लागत और श्रम की बचत होती है।
- कम कचरे के ढेर: AI-आधारित स्रोत पृथक्करण रिपोर्ट्स के उपयोग से, स्रोत पृथक्करण प्रतिशत बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप न्यूनतम कचरा लैंडफिल में भेजा जाता है, जिससे शहर में कचरे के ढेर में कमी आती है और पुराने डंप्स में कोई अतिरिक्त कचरा नहीं जाता।
- वैज्ञानिक भुगतान प्रणाली की स्थापना: ठेकेदारों के भुगतान को प्रौद्योगिकी द्वारा उत्पन्न वास्तविक समय डेटा से जोड़ा जाता है, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित होती है।
- प्रत्येक संपत्ति को अद्वितीय पहचान: QR कोड इस प्रौद्योगिकी का एक अभिन्न हिस्सा हैं। QR कोड का उपयोग करके संपत्तियों की भू-टैगिंग प्रत्येक संपत्ति को अद्वितीय पहचान देती है, जैसे व्यक्तियों के लिए आधार कार्ड होता है।
- स्केलेबिलिटी: यह प्रौद्योगिकी अन्य महत्वपूर्ण डेटा जैसे स्वास्थ्य अभियानों, कराधान आदि को एकीकृत करने के लिए भी बढ़ाई जा सकती है।
- कर्मचारी जवाबदेही: कर्मचारियों की गतिविधियों की वास्तविक समय में ट्रैकिंग, जिसमें बैटरी स्थिति, छवि अपलोड और कर्मचारियों द्वारा बिताया गया निष्क्रिय समय शामिल है, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करती है।
नागरिकों के लिए लाभ
ICT समाधान से नागरिकों को सुधरी हुई सेवा गुणवत्ता, समय पर कचरा संग्रहण और स्वच्छ शहर मिलते हैं। यह प्रणाली धोखाधड़ी को समाप्त करती है और कचरा प्रबंधन के सभी स्तरों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। सम्मेलन ने कचरा प्रबंधन में ICT के कार्यान्वयन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू करने के लिए रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों ने केंद्रीय सरकार से इसे प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि एक स्वच्छ और सतत शहरी पर्यावरण की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।















