महिला आरक्षण कानून आज से देश भर में लागू, संसद में बहस के बीच सरकार का बड़ा फैसला, जारी किया नोटिफिकेशन

33 Percent Women Reservation: महिला आरक्षण अधिनियम-2023 देश में लागू हो गया है। सरकार ने अधिसूचना जारी की है, लेकिन महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया होने के बाद ही मिलेगा।
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फाइल फोटो (Image- Social Media)
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Women Reservation Act 2023: देश की संसद में देर रात तक महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर तीखी बहस हुई। आज शाम चार बजे महिला आरक्षण पर वोटिंग भी प्रस्तावित है। इसी बीच संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम-2023 गुरुवार से लागू हो गया है। इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है।

हालांकि, यह साफ नहीं है कि संसद में इसी कानून में संशोधन पर चर्चा के बीच इसे 16 अप्रैल से लागू करने की अधिसूचना क्यों जारी की गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अधिकारी ने इसे “तकनीकी कारणों” से जोड़ते हुए ज्यादा जानकारी नहीं दी।

अधिनियम लागू होने के बावजूद मौजूदा लोकसभा में महिलाओं को इसका लाभ तुरंत नहीं मिलेगा। अधिकारी के मुताबिक, महिलाओं के लिए आरक्षण अगली जनगणना के आधार पर होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा।

एक-तिहाई सीटें होंगी आरक्षित

केंद्रीय कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसे महिला आरक्षण अधिनियम भी कहा जाता है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने के बाद ही लागू होगा। वर्तमान में लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, उनका उद्देश्य इस आरक्षण को 2029 से लागू करना है।

‘सरकार श्रेय नहीं लेना चाहती’

इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पर शुक्रवार शाम 4 बजे मतदान होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की है, जिससे किसी तरह का भ्रम नहीं रहना चाहिए।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी दक्षिण भारत में उठ रही आशंकाओं को आंकड़ों के जरिए दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद कोई विरोध करता है, तो वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है और सरकार इसका श्रेय नहीं लेना चाहती।

रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को तीन बार पत्र लिखे गए, जबकि टीएमसी, डीएमके और सपा के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलकर समर्थन मांगा गया।

महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बयान

संसद में बहस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिसने भी विरोध किया है, उसका परिणाम अच्छा नहीं रहा है। मैं अपील करता हूं कि इसे राजनीतिक नजरिए से न देखें। यह एक अवसर है कि हम सभी मिलकर विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ें। देश की नारी शक्ति हमारे फैसलों के साथ-साथ हमारी नीयत को भी परखेगी।”

प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला

वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने प्रस्ताव का प्रारूप पढ़ा है। उन्होंने कहा, “इसमें लिखा है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होगा, जिस पर हम सहमत हैं। साथ ही सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने और परिसीमन आयोग बनाने की बात कही गई है, जो 2011 की जनगणना को आधार बनाएगा। लेकिन इसमें राजनीति की झलक दिखाई देती है।”

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि 2023 के बिल में नई जनगणना का प्रावधान था, जो अब इसमें शामिल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भले ही श्रेय न लेने की बात कर रही हो, लेकिन महिलाएं सब समझती हैं और समय आने पर जवाब भी देती हैं। कांग्रेस ने 2023 में भी इस बिल का समर्थन किया था और अब भी उसका रुख स्पष्ट है।

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