नड्डा vs खरगे: संसद में खरगे के बयान पर जेपी नड्डा का पलटवार, कहा- मुझे क्लासरूम से गिरफ्तार किया, भारी बवाल
Mallikarjun Kharge vs JP Nadda: मानसून सत्र के दौरान संसद में भाजपा और कांग्रेस पार्टी के बीच जमकर बहस हो गई। मल्लिकार्जुन खरगे ने सुरक्षा पर सवाल उठाए तो जेपी नड्डा ने करारा हमला बोला।
- Written By: प्रिया जैस
जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे (सौजन्य-IANS)
JP Nadda Parliament Monsoon Session: मानसून सत्र के दौरान आज संसद में एक बार फिर सरकार और विपक्ष में जोरदार हंगामा देखने को मिला। संसद में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए हमले के बारे में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में लोग सुरक्षित नहीं है। इस पर जेपी नड्डा ने जोरदार पलटवार करते हुए कांग्रेस को उनकी सत्ता के दिन याद दिला दिए।
संसद के मॉनसून सत्र में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उच्च सदन में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है, लोग सुरक्षित नहीं हैं।” उनकी बात का जवाब देते हुए बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।
जेपी नड्डा और खरगे में बहस
जेपी नड्डा ने जवाब में कहा, “जब मैं एक छात्र कार्यकर्ता था, तो इमरजेंसी के दौरान जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी तब मुझे कई बार क्लासरूम से गिरफ्तार किया गया था। ऐसे हालात एक छात्र कार्यकर्ता के सफर का हिस्सा होते हैं।”
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VIDEO | Parliament Monsoon Session: “Democracy is not safe, people are not safe,” says Congress president and Rajya Sabha LoP Mallikarjun Kharge, attacking the government in the Upper House. Responding to his remarks, BJP MP JP Nadda says the police acted to maintain law and… pic.twitter.com/pyA2O46sPr — Press Trust of India (@PTI_News) July 29, 2026
राज्यसभा में माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिल्ली स्थित माकपा मुख्यालय एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस के प्रवेश का मुद्दा उठाया गया। जॉन ब्रिटास ने कहा कि पुलिस यहां एक छात्र नेता को गिरफ्तार करने पहुंची थी। इस पर राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखा।
जेपी नड्डा ने दिया जवाब
उन्होंने कहा कि इस घटना को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है और इसे सामान्य कानून-व्यवस्था की कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए। जेपी नड्डा ने सरकार की ओर से इस विषय पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके मित्र डॉ. जॉन ब्रिटास ने जो मुद्दा उठाया है, वह मूल रूप से कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक सामान्य मामला है और इसे उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वह स्वयं छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं। आपातकाल के दौरान उन्हें कई बार कक्षा से ही गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें एक बार नहीं, बल्कि दो बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया और उस समय भी उन्होंने ऐसी परिस्थितियों का सामना किया था।
जेपी नड्डा ने कहा कि छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहने वालों को कई बार कानून के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और पुलिस अपने दायित्व के अनुसार काम करती है। इस मामले में भी पुलिस ने अपने कर्तव्य के अनुरूप कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि इस घटना को सनसनीखेज बनाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
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सदन के नेता ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ी सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई है, जिसे पुलिस समय-समय पर करती रहती है। जो लोग छात्र आंदोलन या सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं, उन्हें ऐसी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने स्वयं भी अपने राजनीतिक जीवन में ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है, इसलिए इस घटना को असाधारण या लोकतंत्र पर हमला बताना उचित नहीं है।
वहीं, माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास के वक्तव्य का समर्थन करते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि जॉन ब्रिटास ने जो मुद्दा सदन में उठाया है, वह बेहद शर्मनाक है। किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह पुलिस का घुस जाना स्वीकार्य नहीं है। आज अगर माकपा के कार्यालय में घुसा जा सकता है, तो कल किसी अन्य राजनीतिक दल के कार्यालय में भी ऐसा किया जा सकता है। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी
खरगे ने कहा कि वह सभापति महोदय से आग्रह करते हैं कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए। जिन्होंने यह कार्रवाई की है, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि वे लोग कौन थे और उन्हें वहां भेजने का आदेश किसने दिया। आखिर किसके निर्देश पर वे राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में पहुंचे। सरकार को इस मामले की पूरी जानकारी सदन के सामने रखनी चाहिए।
इस बीच सदन में लगातार हंगामा होता रहा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 तक के लिए स्थगित की गई। 12 बजे सदन में कार्यवाही शुरू होने पर भी यही स्थिति बनी रही। इस पर राज्यसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
